आधे सफ़ेद सच्चे ()साल

गोदी के काल्कि को है ना इंतज़ार

सृष्टि की कोख का ख़ाली खल कख-वार

तुम-हारे अदर भरपूर त्रिकाल का अंत-कार

ना लौटाए अंदर तरपूर तरो ताली ताल तार

नही आया य-कीन भरपूर भहाली बे-हाल ब-हार

अन्न मन्नत मधे

गोदी में अंनगिणत अन्न-गणित ख़ाली आधे

सृष्टि की कल्पना कागे ख़ाली खागे

अनंन्त में लींन आरे-वारे न्यारे नागे


ख़ाली ध्वनि धे धींन धन्धु धा धागे

दा दयाद द्वार


काल्कि आधे बिंदु द्वार दहि दौड़ा दायाँ

आधे बिंदु आमने सारा दिन आज ख़ाली खाया

ख़ाली माँ का रात काला आधा सामने साया

आँखों में खूह खुला खंड खरपूर खमाया

सारथी सा साथ सखाया ख़ाली समाया

पिगला गाते

पढ़ाई का बल मत पढ़()आई

और सास का दामाद कहा गया है धरने
i को बाहर खरीदने खैर खाते
भरपूर भक भर अदर भय-लाते
एक-एक ना समझ बाहर बाते
पूरे पैर पड़े ना इधर उधर प()ते
परपूर पढ़ पिगला गला गाते

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o_ening an em_tee _lack u_b_ella in()id _ill _ring
y-0-s _ad _uck th@ s_a-y-s ne_er _uch
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is y lea()ning _as no wit_in tu()ning
_h@ do()s th@ _ook _ik in()id chu()ning

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जब सास के दामाद अदर नही दफा
तो दिखावा का भरपूर मुखौटा बाहर खफा
किसने वेखा ऐसा भरपूर भोटा भफा और सोटा सफा

खो(सो)ए

रिसकी राद में दिन रात ख़ाली खोए


वही सांसो के ख़ाली आँसू पिरोए

ख़ाली बंधन बांध भीतर भिगोए

साँस भी तैरे सारे असीस सोए

ख़ाली जोत गोदी की बहार बोए

प्रेम सरपूर सगे

ख़ाली प्रेम के नितनेम से y-0-s in()id u के अजनबी अंदर आते आ

तू तोड़ के तो तिखा ख़ाली द(घ)र का दरवाजा

डर डही डा डोर डागे तुझे तो अदर भी न मिले सज़ा सरपूर सगे

an ()tile

घर के अदर तूतू मे मे दुनिया की एक-एक _i pro_ile हो तो

सास के दामाद की हर एक _ile की अदर नही आधा जमन्न घुट्टी घुलती घही घा

गोदी की हर हर ख़ाली बुँदिया miss_le

सासो का भरपूर e*ile

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