हमने तो यही है आज पाया
गोदी का भीतर ख़ाली खाया
अपनो ने पूरा आधा दिखाया
गले में आधे दरा दबाया
तुमने दहरा दाज गवाया
इधर उधर आधा भिखाया
अदर बहार एक बूढ़ा बढ़ाया
गाठो गा गढ़ गट गे गिठाया
Category: innate
नींदी()नी

बिंदी बीचे
आँखे मीचें
ऊपर नीचे सींचे
इधर-उधर भाली भीगे
अँदर काल कारा कींचे
()हाज-हहा()
दुनिया के एक-एक असुर ने ही सूखा सिला सा
गोदी के माँ-बच्चे के सुरो सी ख़ाली खिल-ख्या()रियाँ
अब आना अहा आ
_ai_ing _ead chil_r()n’
_ast 0 pre_ent in()id _ast
हम तो आज ही आरे-नारे
तुम-हारे हिटने हारे-वारे
रोga
sun_ise yo_a _@c_es _ir in()id _un_et भोga
1 un_verse गोदी से मैच महि मड़ता
ता रा
भरपूर भ()दा भूडा भास सास सा सरीर
कैसे किठाये क्यो नही क()न का ()कीर
0_ing vs ever-y-t_ing
हम-आरा अनुभव कभी तुम-हारो के भाव से सच सही सड़ता
तुम-हारो के नर का तन कौन साफ़ सड़ता
दुनिया की एक शाति आयी कहती क्यो कही कडता
क्यो के कितने कास कड़े को
अदर गी गडपूर ग()मी गी गोलता
गोदी में to()al he@ _ave से क्या कोगा
क्यो कही काडा किया ()कोर
ਚਿੱਟਾ ਛਟਾ
ਬਾਬੇ ਬਾ ਬਰ ਚਿੱਟਾ
ਗੋਦੀ ਦਾ ਦਾਗ ਦਰਪੂਰ ਦਾਵਾ ਦੋ-ਲੂਟਾ
गोदी गे घी घा
तूतू मे मे का gigगढ़ गारा गोता
y-ले
ever-y1-t_ing y re()ill
0 ori_in-al boro_il
घमोड़िया घुले घायल घिले
अन्न-बन
आम-आण ओ आड़े अहि आया
जो जू(ठी)बान जय जान जलालो
कलयुग के काल कालो
0 ()fi_al
re()ener@ b_eat_
0 f@ ‘ _eat
0 आला
आधे आ ओल आला अहि
तुम-हारी दुनिया मे अदा
सो सूखा सडा सू-ताला सही सदा

You must be logged in to post a comment.