आज घर ()माया

हमने तो यही है आज पाया
गोदी का भीतर ख़ाली खाया
अपनो ने पूरा आधा दिखाया
गले में आधे दरा दबाया
तुमने दहरा दाज गवाया
इधर उधर आधा भिखाया
अदर बहार एक बूढ़ा बढ़ाया
गाठो गा गढ़ गट गे गिठाया

()हाज-हहा()

दुनिया के एक-एक असुर ने ही सूखा सिला सा

गोदी के माँ-बच्चे के सुरो सी ख़ाली खिल-ख्या()रियाँ

अब आना अहा आ

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हम तो आज ही आरे-नारे
तुम-हारे हिटने हारे-वारे

ता रा

भरपूर भ()दा भूडा भास सास सा सरीर
कैसे किठाये क्यो नही क()न का ()कीर


0_ing vs ever-y-t_ing
हम-आरा अनुभव कभी तुम-हारो के भाव से सच सही सड़ता

तुम-हारो के नर का तन कौन साफ़ सड़ता
दुनिया की एक शाति आयी कहती क्यो कही कडता

क्यो के कितने कास कड़े को
अदर गी गडपूर ग()मी गी गोलता


गोदी में to()al he@ _ave से क्या कोगा
क्यो कही काडा किया ()कोर