हम तो बे()लब पत पा पान पकने पही पाते
फिर यह नाक बिना के कौन क्या किया काते
छोरी छथनी छा छल्ला तार ता तल तल्ला
हम तो बे()लब पत पा पान पकने पही पाते
फिर यह नाक बिना के कौन क्या किया काते
छोरी छथनी छा छल्ला तार ता तल तल्ला
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सप्तऋषियों ने त्याग दिया था भोलेनाथ का दिया सारा ज्ञान
असुर १-१ को स()भाल से सखे सा
भरपूर उत्पादन सास-कर कलयुग के अदर
कर कुकता क्या का
आधे को पैदा अंदर करने का दुःख
और अंदर मारने का सुख
आधा सास भरपूर भूख
घर के अदर है हसना मना
इसी लिये बाहर हसना योग
गोदी की ख़ाली जागरूकता
को रोके जडपूर जा जना
ब()वास बडपूर फला फूला
तब क्या अदर अब आयना भूला
धूनी धमी धरोहर धूला
रूनी रमी रा रुकता रुला
ख़ाली आत्मा ख़ाली से खूट खर छूट छाती छटती छा
बाया बा बकाल बर बलग बया ()या
सृष्टि गोदी में नहीं है कोई
इतिहास जो हसे हास
१ दुयीया वास
ना आया भरपूर
भर-हास अभ्यास
खतम करो खडपूर खास
हरियाली निराली गोदी की जमीन
और
एक दुयीया अदर बज()र-बट्टू बीन
अब एह च()मचे को देख दर दाड़
बो-तल ख़ाली है तो लेटा है
और भरी है तो खड़ा खाड़
कमाल कहा करा काड़
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ईत्नि मुश्किल से गोदी के पूर्ण पेड़ो के प()चे
प्राणवायु(o*()gen) का आतम-निकास पार पड़ते
उससे भी दुगना असुर घर को अदर बाहर उजाडते
१ दुयीया की हव() की आग मे ()मीन का पा() पना पास-मान
def_nit_ly 0 co_su_ming असुर
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