बुलायो बाम

आधे ख़ाली आधा घर के भरपूर असुर

आधे स्माधि में रुकावटे डाल रहे है

कहा है आधा आम

गोदी के वानरों के ऐनके इक्कठी
की हुई काठी पे आ रहे है
आज तो नहीं पहुँच पाएंगे


त्रेता का आज कलयुग के
कल में कैसे पहुँचेगा

अनु()यो की मति

सब को यही सन्मति देता भगवन

सारा दिन तेरा मेरा
रात कहा रह गयी

यहा मेरी अनु-मति के बगैर कोई आ नही सकता
इसका बल मत
कंस का भरपूर घर अदर-बाहर आने की
आज़ादी ख़ाली कस को नही दे सकता

फिर यह मेरी(मेरा) किसकी मति से
दुयिया के समाज की तूतू मै मै मे खडा
no 1

मौत के मूह मे जो गया अदर वोह बाहर कहा निकला
तो लड़ते रहो दुयिया के समाज की तूतू मै मै
के भगोड़ो भरपूर भाया पिटला

दुयिया के समाज की तूतू मै मै का मूह कहा होता है

जन्म/मरन का मुँह gut ब्रह्माण्ड की ख़ाली सृष्टि की गोदी
किसका क्या नाता छूटा किसका भरपूर भूट्टा
आखे खुली आखे बद एक फिसला फूटा

गया गज गज ग्वाला

कंस के काले(वार)नामे कौन समझे ढाला
आज का कलयुग न निगलने ले
आधे अंदर शांति(निवा)शाला
भरपूर विष-वा प्याला

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शांति(आधे )शाला

शांति(आधे )शाला

शांति(आधे )शाला

दो दरो

हम-आरे पास साँसे नहीं है भरपूर खराब करने के लिए


सास को तो दुयिया के समाज की तूतू मै मै की ही
खुशबू घर के अदर चाहिये

नली नली

मुरझा गयी कंस की कली
हम क्या करे रात न रली
आधा ढेर ढाल गली गली
छाया छे अधेरे डली डली

वीरावती कहती अपने बच्चो को
अब
काली कुण्डी कगालो काली