सृष्टि गोदी के नंदन
आऔ हमारी सांसो से समधन
वस्सु राज्जे वंदं
श्री कल्कि जी के
बिंदु बंधन
सृष्टि गोदी के नंदन
आऔ हमारी सांसो से समधन
वस्सु राज्जे वंदं
श्री कल्कि जी के
बिंदु बंधन
जितनी ज्यादा पेट से भरपूर हवा
निकलती रक्ति
उतना ही गर्मी-ठण्डी का अनुमान
सांसे समा शक्ति
_i’m_act of soc_ial med_a
is sa_e for ys-lf
thou_h ()_elf in()id
is in da_ger of
भरपूर de_
अलख निरंजण
सृष्टि गोदी का अन्न-जण निराकार
भिक्षां देहि भिक्षां देहि भिक्षां देहि
हे अन्नपूर्णा देवी
आधे को गोदी नंदन के लिए
गोदी उद्धार आदान कीजिए
भगवान का शरीर तो आराम ध्याते
अंदर देवी की ख़ाली शक्ति साज सजाते
आप आराम से आंखे ध्यायीये
हम मियानी को लुभाते
सृष्टि गोदी का ख़ाली ज्ञान आधे को
बुँदिआ जीवित जीने के लिए
धयाया धा
जो तुम हारो ने भरपूर जुबान
उची उठायी हारा
खींच लेगा गोदी में
आधे वारा
ख़ाली बच्चे ख़ाली माँ की कोख
में उँगलियाँ नहीं उठाते
em_tee chil_ren 0 go out
for sigh_ s(ee)ing
_either in _or out
हमारे पुत्रो का ख़ाली गुण-गान हो
हमारी पुत्रिओं का ख़ाली देवी दान आदर लो
वैराग्य के अंदर नहीं होता
ख़ाली माँ का भरपूर सौभाग्य
हम अगले तो क्या किसी भी
आधा जन्म में तुम्हे देखेंगे नहीं
तो गोदी तो सारे जन्मो में छानेगी
तो पूरे ही निकलोगे अदर बाहर
सास ससुर सहर
सृष्टि गोदी के पानी ने बनाई बिजली
ने पैदा की अंदर की बि(दी)जली क्या मारेगी
आधे शक्ति(शख्स)शालि
निखली भरपूर अकल खेस खुजली
क्या करेगा नरकानर नाडा
नकली
You must be logged in to post a comment.