y-0-s _u-man 0 be-ing in()id u su(1)_an
con_rol_ing 0s & in()id u 0 _ot
सास के दामाद की गाठो के क()मो ने अदर ना कुछ सिखाया
सब कुछ बाहर के इधर उधर के पूरा-तन ध()मो ने
तूतू मे मे दुनिया का एक-एक नेक बनाया
भरपूर भाया अदर-बाहर जोड़पूर जाया
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सास के दामाद की गाठो के क()मो ने अदर ना कुछ सिखाया
सब कुछ बाहर के इधर उधर के पूरा-तन ध()मो ने
तूतू मे मे दुनिया का एक-एक नेक बनाया
भरपूर भाया अदर-बाहर जोड़पूर जाया
_ick y
0 ( ) wa_ch_
घर के अदर इधर-उधर की लड़ायी
एक देश के अदर-बाहर की पूरी पढ़ायी
भू के लेखे में असुरो की ज़मीन की ऊंचाई
न मापी किसी ने अपनी जुबान जी तूतू मे मे भरपूर तुरायी
किसी को न भनक सास के दामाद के
भरपूर भाड़ भी भगदड़ बिंदी बी बिदायी
y-0-s co_es in()id em_tee a_one
u _orm go()s out _eet 1 _orm
b_ing _ack _om 0 de_orm
deco(_an_it-is-er)
y-0 _torm
each i-नर-tia’ one p_int is un-i_u _ar _om t_ough y-0-s in()id u _eep _aeing _am _int 0 _om
भू के लेखे
भरपूर भुला अदर भूलेखे
खु()ले-आम घर अदर ठेखे
बाहर आये जुस्त-जबर जोर जुबान के
भरपूर जायके भाय ज()य-खे
no()thing is to()tal p_i-or-it-ee
0 u _av y-0-s in()id u _hai_ty
_h@ an in()id u _orm
y-0-s _ol hu(e)man 0 de_orm
()i-ew out()id _ol _orm
0_ing is eve_o_d predi_t-a-ble
y-0-s in()id u _it 0 _eet do_ble
श्री कल्कि की मईया की गोदी को
तुम-हा-री तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक ने
दरपूर दुर्गत दा()याँ दहशत दम-हार दिया
इसका सारा सार न चूका-पा-येगा
भरपूर भसर भोड़ता भमय भा भाड़ भैया
in()id u _ooped _urse
0 re_ain _ol _merse
far far 1 co_verse
in()id _ol y-0-s _urse
र के हम राही डा()ली रहम
भो भनाये भरपूर भ्रम
भही भगाये भन-दर भे-यम
घर के अदर पूरा बेरहम
बही बगाना अदर का क()म
न ढूढे सास का क्रिया क्रम
u _an _eep bi_t_ing in-if-i-n_te आधा जन्म in()id
each सास t_ough u _ill ne_er _ease
one in()id u बेरहम
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