मु(ह-कहा-के)रख बाहर परा()नी
सास है क्रूर-क्षेत्र ल()हू की दीवानी
न रुके तलवार चढता पडपूर पानी
अदर गिरे न क्यो कही काव क-मानी
मु(ह-कहा-के)रख बाहर परा()नी
सास है क्रूर-क्षेत्र ल()हू की दीवानी
न रुके तलवार चढता पडपूर पानी
अदर गिरे न क्यो कही काव क-मानी
आधा अदर नरपूर निरबल
आधा बाहर दरपूर दुर(मूह)बल
और बीच मे इधर उधर दरपूर ()थल
जन जन दामाद उज्ज(भरपूर)बल
यह क्या च()डी बनियान की दूयीया _ut से बाहर निकाल राखी है कि()की
इसे देख के कौन-कौन से दन्त म()जन अच्छे बुरे भलेगे
ys-lf 1 a_ult
घर के अदर _each fu_l wa_er नही है
err& _un out s_a_er
an out ()fi-nan()c_al
1 gu_ar-antee
0 in_lude in()id
ge_er-al’ y
(i-)do u _av ri_ to ()iew
em_tee _ut
is th@ _it
एक अंत एकांत का संत
गाठो की ज()जीर
एक-एक पूरी लकीर
क्या आये क्या जाये
अदर बाहर फ़कीर
रात रौदे दिन रूले
तक़रीर ती तकदीर
@ in(नर)4ma_s_un oवर_o_d
y-0-s in()id u _ol s_um_el abo_
fi_l in _app-li(va)cas_un so_red
in(नर) com()p_@_ 0 _oor _lo_red
_either 0_ing le_t _or ever_t_ing _it
1 _y_ fo_d 0 un_old de_p(_ar)th_ bi_
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