१ भगवन सबको एक होने की सन्मति देता दा
बल मत यह है की सब एक ही भरपूर छूटे छा
तो अछूता कौन रह रहा
१ भगवन सबको एक होने की सन्मति देता दा
बल मत यह है की सब एक ही भरपूर छूटे छा
तो अछूता कौन रह रहा
दूयीया की शाति एक छिवि छेपे छायी
घर घर के अदर बर-तन चमका(आ)यी
आयनो मे आग उ(डा)ठा थप थपाई
अदर ही भरो भरपूर था-था-पायी
नर आखे मादा सलाखे
जुबान जाडे ज्वा ज्वाखे
गोदी के अंदर आधा जन्म सांस ()नाता
और घर दूयीया के अदर
एक उची दूकान दाता
दिन को आधा जन्म मिला
अदर भरपूर दिन दुया ढीला
चाव चा चमक च()मका चीला
आते ही टालो तवा ते ताल तीला
बरसे अ-गारा आग र(स()खा)गीला
ਸਕਲ ਤੇ ਟੂਣੇ ਟਾਰੇ ਟੋਏ ਟਾ
ਤੇ ਜੁਬਾਨ ਜਾਦੂ ਜੁਗਾੜ -ਜ()ੜੇ ਜੋਏ ਜੇ
ਲਘਿਯਾ ਅਦਰ ਘਰ ਘੋਏ ਖਾਲੀ ਖਾ
ਭਰੂ ਭਾਰ ਤਾਲ ਤੁਟੈ ਤੋਏ ਤਾ
a _ime is ru_ning out
le_
u _un _ach in()id _out
खामोश खरा खरगोश
गोदी का ख़ाली खरमाया ()दोष
मनाये सास मडपूर मदहोश
आधे बत्तियायें ख़ाली ख़ड़ा निर्दोष
ढूंढते ढ़होगे डग डगे आग़ोश
अच्छे-बुरे करमो की अदर-बाहर दहशत
घरपूर घर के अदर कोई नही देखता
तो क्यो कही अदर खुली लू()ट इधर उधर
आधा जन्म करपूर करिया()करम के काड
बाहर रहम रडपूर रन()ता रेकता
मानी न तूतू मे मे की बात
बुत बना मसि मसि मुक्ता
१४ को १५ बिजलियाँ गिरकी
गितनी गाथा गौरी गस गमकी
आम ओहले अंदर रंग रमकी
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