ख़ाली दामाद तो देने से रही सास
gut गोदी को (लेकिन एह तो हो के
रहेगा आज के युग में)
आधे को क्या बीमा(वार)रिया
भरनी है तूतू में में की दुनिया की
कम(खा)यी से gut गोदी के अंदर
a ba_ic _eed of ha_f
wit()in _ur()ace breathing
is to ful()ill
y _chill
ख़ाली दामाद तो देने से रही सास
gut गोदी को (लेकिन एह तो हो के
रहेगा आज के युग में)
आधे को क्या बीमा(वार)रिया
भरनी है तूतू में में की दुनिया की
कम(खा)यी से gut गोदी के अंदर
a ba_ic _eed of ha_f
wit()in _ur()ace breathing
is to ful()ill
y _chill
y th@ _hich is _ast _ound
dra_@ic to _ring y _r_stic
me-as-ur-ing gut
surface()all pla_tic
y _kin is _arve_t orp()an
in()id u-bodi to _ace
out()id y wor_d to
c_eat com-_un-ty
i.e.
_iv _ad y p_en_y of y
be on with uni_vers
is th@ out()id uni_vers is
full_ess of on()s _ik u in()id
y gut surface()all
on un-i-vers
प्राजी का जी जब गायब हो के
ना की भरपूर लय को अंदर ले आएगा
तब सास के दामाद में भरपूर
प्रलय आ भायेगा
gut गोदी और अंदर के ख़ाली बच्चे को
तो सब कुछ देरी से ही मिलता है न
लेकिन अन्धेर भरपूर को तो पूरा
पता मिलेगा नहीं या
पूरा आधा लूटेगा
तल के सास के दामाद अपने
अदर बचो के लीये खड-डिया बुनते है
उसमे gut के कच्चे भरपूर गिरते है
इसी लिए बान की जू भरपूर
तान के तन तनते तय
y in()id u & d_ought
mirr(@g)-ring gut
godi’ d-rou()t
y in(out)id u @_rac()ing
op-pos-it y to re_el
y in()id u
आँखों के सामने का असर भरपूर है
तो पीछे का क्या ख़ाली जा()येगा
भरपूर के सामने
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