परपूर पैसा पा पड़ा लरपूर लालच लूरा लड़ा
अदर-बाहर खचाखच खरपूर खोपड़ी खा खड़ा
गाठो को गट मे डुबाये दौड़ती द()रजा दा दड़ा
साथ मे इधर उधर को बिठाये बैठ बाया बड़ा
दो(गाठो)गुनी तरक्की पाये सास सरपूर सड़ा
परपूर पैसा पा पड़ा लरपूर लालच लूरा लड़ा
अदर-बाहर खचाखच खरपूर खोपड़ी खा खड़ा
गाठो को गट मे डुबाये दौड़ती द()रजा दा दड़ा
साथ मे इधर उधर को बिठाये बैठ बाया बड़ा
दो(गाठो)गुनी तरक्की पाये सास सरपूर सड़ा
y-0-s in()id u h_m ki 0 ock du _ock
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he-ad-0-_ail-0-_ead
al-go-ri_h_m @hing _alk
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_ach t_ad_ition @ in()id u h_m
ach ever-y1 r_am
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बाहर कलयुग का क्या हो यह तो सास के दामाद की
आखो को भरपूर भरा (इधर-उधर) भिखेगा
और gut के अदर का भरपूर कलयुग का काम-जाम
अदर ही गर()पूर गायेगा गाठो गा गमगीन गान
बाहर के अंदर
एक भरपूर ज़ुबान से जोते जान का भरपूर जहान
भूरी भुझी भान भरा भूर भे()मान
इधर-उधर काम काये तलो ती त-धार तान
भर()पूर भूले ख़ाली खा(री)खी खान
pre_ail _ol ri_eous_ess wit_out to()tal left_hiou_ness
0 re-co_n-is hi_her pu_pos of y-0-s in()id
u + to us – f_iction to p_opel ys-lf for
su(b_ect)faces g_o_th & ol @_iety of
1 j()ne-y of adha janam
गुरु भगवन खाड़े खोड़ खे
सांसे लिए ज़मीन पैर अंदर मिलाए
गोदी की मईया ऐसा सुरूर सा सोए
सब अपने अंदर खाये-जाये खोये-मोये
बू-की वानी ना घोलिये जो गोदी दुलारी ना सुलाए
मन का भरपूर आपा भुलाइये जो बैरी जग वेहला बतियाये
जिनको मन की खोजनी आपे अंदर गम होये
बैरी ज़ुबान जा जंदर जोर झाके जोये
अदर नहीं रौशनी राते रोम रोम रोये
चार दीवारी भरपूर चारी सो अदर धरे मधोये
अब बैठ ख़ाली खुद और ख़ाली खोज खैर खाये
चिता की चरपूर चका-चक चाक
कलेजा काटे कत अदर आत-कात
बिगड़ो बन बुया बा बद बरे बया बात
तब तहा तिलाये अदर ख़ाली खात
u _ar a_on
_ell ch()n ch*t c_opping ch()_ar
u c_oice _eed or_er
y dem( -it)& ch_os _un po_er
in()id or out()id
ever-y1 _ill c-u-p
0 al()n in()id _ut
for u _ar loo)ing @ 1 wor_d for in()id su(ra)p()rt
सास की यह वह तो ठीक है इधर उध()र
पर y- -s का भरपूर भाठ-गाठ सामान तो
गोदी के अंदर ही छोड़ छे छ()हर छायोगे
आधा लाहर लुटा के अदर जा(सा)ली सास सलायोगे
मै मिया मी-ठू मरपूर मथायोगे
बाते बाते बाते ना ब(क)टे ब-राते
ख़ाली मईया से मिल के भरपूर भच्छा मेहफ़ूज़ मुया म()चा
ख़ाली घर आप को भरपूर भोट भाद भी बही बिला या यीला न()चा
इस बात का बही बाया ()पका प()चा
आधा सका भरपूर भच्चा
आधे रुका
ख़ाली मा ना झुका
रहने दे घर भरपूर गू-का
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