भरपूर भुर्गति

श्री कल्कि की मईया की गोदी को

तुम-हा-री तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक ने

दरपूर दुर्गत दा()याँ दहशत दम-हार दिया

इसका सारा सार न चूका-पा-येगा

भरपूर भसर भोड़ता भमय भा भाड़ भैया

_ime_in

र के हम राही डा()ली रहम
भो भनाये भरपूर भ्रम
भही भगाये भन-दर भे-यम
घर के अदर पूरा बेरहम
बही बगाना अदर का क()म
न ढूढे सास का क्रिया क्रम

u _an _eep bi_t_ing in-if-i-n_te आधा जन्म in()id
each सास t_ough u _ill ne_er _ease
one in()id u बेरहम

er-or

0 eas_y _ask a_ead 0 _ask

neit_er 0 _af nor y-0-s in()id u _on s()y

u _ar 0 even in()id o_d to ena_t भरपूर fra_d
y-0-s in()id u _ar even in(out)id on wor_d

u 0 t_ink of ys-lf _iv in re_l bu_l
& _ot_ers _ar li-ste_d 1 _ur-ly in()id who_l
& ever-y1 e_s di_es _ipping 0s of ea_l

y-0-s in()id u _ar @tach _ol _oss
th@ _hich is pa_t 1 _ow ful_illed le_st _ill de_ach g_oss
sum1 _ill b_ing up_it _oss
y-0-s in()id u _ar _ol _os

मै शक्ति एक महान

कितनी आसानी से कुचल कटे एक-दूसरे के न()चलते नाते
और अपने अदर की भरपूर भूरजा भय भू-चल बही बकते
तूतू मे मे की अदर की भरपूर बाते एक दुनिया मे उड़ाते
किस-किस की हवा को गन्दा गरते गरपूर गिधर-गूधर गाते
इसी लिए तो एक-एक जन्मे अदर के भरपूर भाते

बिना कुचले तो तुम आखे भी नही खोल सकते
दरपूर दरवाजे दहाड़ दरो दिन दिहाड़े राते
मुजले मुखोटो मे मोल मोड़ मरपूर मक्ते

गोदी का सारा किसाब-हिताब बायां-दायां दाते
ख़ाली लाज्वाब ज-लियायो भरपूर नवाब नाते

वि-सर्जन

अब भगवन भो भरपूर भूर भयालू भा
सास सा सर्जन सरपूर सु()रशन सा
आधा जनम का आना-जाना पूरा पति एक परखन खा
क्या करे मईया की गोदी में सृष्टि का दाना-पाना
ख़ाली द्वारे ढके ढाक ढा

गोदी ra()

सृष्टि गोदी _eed to()tal c_an_e
in()id on wor_d ___ange
0 even 1 as()ur _ol _f_y o_d _ange

सृष्टि गोदी की आँखों में नैठ नहीं नकते
और आधे के आ(सा)मने गोदी में
भरपूर असुर दूरी दूर(घाव)गध दरते दा