_afe चखो

भरपूर अपनी मदद अंदर की पक्की ईंटो से करवाता है


फिर तो ख़ाली बैठना भी आसान होगा वेहले के लिये


रोज रोज के झंझट को ख़ाली एक रखो 

आखे

वेहली आंखे सास के दामाद को

भरपूर प्यार से पड़ती है


इसीलिए भरपूर प्यार की आखे

वेहले को ही स-वारती है

-ल

तूतू में में की दुनिया पूरी जेल

एक चोर एक सिपाही का भरपूर खेल

भरपूर आधा इधर उधर पूरा मेल

एक बाहर भागे एक अंदर रेल

अंदर का बच्चा वारा फेल

अब भागो आई सारी बूंदियो की

मईया का gut _op ख़ाली a-वेळ

निराली छाया बांधे ख़ाली gut गोदी ऐल

पडो

सास के दामाद की पढ़ाई बहुत हो

गयी gut गोदी तो पहले से हे डूबी पड़ी है

(पिछले, आज और आगे को मिला के

कलयुगा 2 कलयुगा

भरपूर ने तो इक ही काम भरना है)

दामाद तो हमेशा ही क्यों की निराशा

की आशा को ही पूरा पांडेगा