घर की नज़र के बाहर तो भरपूर
मि()ची टाग राखी है
कान के छेद में क्यों नहीं डालते
आंखे तो बचाया ही लायेगी
कानो के छेद के अंदर
भरपूर भय के लिये
घर की नज़र के बाहर तो भरपूर
मि()ची टाग राखी है
कान के छेद में क्यों नहीं डालते
आंखे तो बचाया ही लायेगी
कानो के छेद के अंदर
भरपूर भय के लिये
भरपूर ईंट का जवा(न)ब
म-रद ही देगा इम्तिहान
दौड़े इधर उधर भरपूर मचान
किसका आया है फरमान
मौत न देखे सर का भरपूर सामान
a_er()t
तुछ मानस
मान सास फिर उपवास
तेरा दिखावा भरपूर वास
मा को लेके नस/नस का दास
गोदी के बाहर भरपूर जायेगा बिना त्रास
कलयुग के या()त्रियों को
आधा जन्म के भरपूर दिन-रात
अंदर बीमा(या)रियो की
शुभ-काम-न-आये()
भू-का प्यासा आधे कितना भरपूर भैभीत है तूतू में में की दुनिया की तूतू से
gut गोदी के ख़ाली शेर से कहो पूरा li-on
y in()id u do hav 2 *_ress gra-y-ti(mul-ti)tud of y in__tion
in-su_icient use of po_ent- lo-ti-on
आधे बूंदियो के ख़ाली बैठने से कितनी जलन होती है भरपूर वेहले को
हर वक़्त gut सृष्टि को भरपूर नाम-आम (b_am )
आधे तो जैसे तो गोदी का भरपूर विनाश-व्या-कारन हो गया
बचो यह है दांतो की बनावट
दांतो की चमक नकली है
मेटर जी
कहते है रोगी को बैठना नहीं आता
भिड़ता रोग भगाना भय भाता
इधर उधर एक नहीं इत-राता
इतना भी नहीं ध्याता
बैठा रोग भीतर मु-खोटे लुभाता
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