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अनगिनत सास की भरपूर किताब
आज ही होगा भरपूर ताव का हिसाब
दिल थाम के रखो अदर हिज़ाब
इधर उधर लेगा एक एक का नवाब
बहार न निकले ज़ुबान का रुबाब
देखो अंदर ही रहे इत-काम का
भरपूर जवाब
बस करो आधे
और नहीं वाह देह
gut गोदी को न मिला ख़ाली तेह
कौन भगाये भरपूर भय
रात-दिन न जगे ख़ाली लेह
आप ही करो ख़ाली मेह
असुरो को घूंघट ओड़ के रखना चाहिये
gut गोदी के अंदर
उससे भरपूर आखे फट जाएगी
और घु-घट को भी पहाड देगी
जो भरपूर कड़वा बोलते है
वोह अदर बाहर के भरपूर को धोखा देते है
और जो मीठा बोलते है
वोह इधर उधर के भरपूर को
मीठे के सदवा में तोलते है
अब भरपूर ने राह तो निकल ही दी है
मिला देगा कल की
चाह से कौन छुपाये
भरपूर के इधर-उधर के वास्ते
y _ell-b()ing is
(he-s_e-we)al-thy
u-()odi-()ind
so th@ _hich is pa_t
_ill _eep b()ing out of
y in()id u b_ast
& th@ is _ood thin_
कितने जन्मो के अंदर आधा
एक बलवान रहता है और
शुन्य जन्म में तो निर्बल ही मिलता है
शुन्य जन्म मिलता नहीं
gut गोदी के अंदर ख़ाली ढाल के
अपने आप शुन्य साँस
ढल जाता है
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