सिर-के के अंदर सब जियो के
सिर पैर ठंडे ठंडे शरीर भी सुन्न ख़ाली
सास के दामाद को तो भरपूर गर्मीं चाहिये
जग(की)राता जगाने की जय
सिर-के के अंदर सब जियो के
सिर पैर ठंडे ठंडे शरीर भी सुन्न ख़ाली
सास के दामाद को तो भरपूर गर्मीं चाहिये
जग(की)राता जगाने की जय
असुरो की नाक और जुबाक
तेज भरपूर _alk
गोदी की गन्दगी से करते है
ma()ch _ic _alk
जैसे खाना वैसा वास
भरपूर sa_iety on रास
चलो चसले रास-लीला
सास के दामाद की _ta_k
भरपूर आस के आस्तिक
gut गोदी के नास्तिक
u-nit-y con-sci()us()ness
on _hol()ness
()es
l_ate y in()ide u
gut _ur()ace()all wor_d
अब भरपूर तो सास में है
पूरा बेशरम और है पूरा बद()मीज़
खेंचे भरपूर कमीज़
gut गोदी का सूखा क्या करेगा
खींचेगा लकीर न लाँघ
सजे पूरा अकील ख़ाली बैठो
बूझो ख़ाली खील
boo_ing week
_ive-a()a-y thin_
_eft _an end _ong a-go
_er()e rit
for भरपूर is _rit
_h@ out th-er is wit()in u
y _ood ma()ch a-li()n
भरपूर _ord
बुरे वक़्त में भार(भरपूर)पका पैसा
काम()आया अंदर भरपूर लाया
ने gut गोदी को
बुरा भरपूर
दिखाया
y in()id u ne_er un_er-s()ood
nothing ne_er no u
राहु ने सोमरस तो निगल लिया
लेकिन गले से निचे नहीं उतरा
न ही उतरेगा किसी भी युग में
धढ़ क्या करेगा शरीरो के बगैर
तो बोलो आधे की ख़ाली खैर
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