कोशिशे तो बहुत होती है
जीवन व्यतीत करने की
(व्यतीत क्या करेगा अतीत के अंदर
ढूंढते ढूंढते थैंक जायेगा)
पर क्या करे
पहली बात भरपूर तो नाकाम है
और पहली बात भरपूर तो व्यस्त
है तलवे चरने में
अब एह लात तो सीधी है
कोशिश के अंदर भी सीधा निकला
बाहर भी सीधा
टेढ़ी कोशिश काम नहीं देखती
फिर भरपूर ने कोशिश की
रेखा को कब देखा

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