जितने मू उतनी जू-बाते
काग काया कालक न ख़ाली राते
चा()दनी की भरपूर बरसाते
आयना न देखे मुखोटे भरपूर सजते
भूले भले न ख़ाली रहते अंदर रखते
जितने मू उतनी जू-बाते
काग काया कालक न ख़ाली राते
चा()दनी की भरपूर बरसाते
आयना न देखे मुखोटे भरपूर सजते
भूले भले न ख़ाली रहते अंदर रखते
भरपूर शरी आप न मिटा सके बूंदियो का श्राप
नही बदला भरपूर बदला लेने का पूरा पाप
आप आप आप लगे रहो भरपूर बाप
भाप न जाने अंदर का भरपूर माप
is y gen_(er)le-man se_sit-ive on to
_on gut surface()all f()ont co_si_er-ing
in()id un()not s_it to pass _all b_unt
भूल जायो आधे देस
ऐसा बदला नही वेश
क्यू ढूढे भरपूर सन-देश
गोदी को करे कैद भरपूर भेस
an e_r-li _orn-ing _alk is
_les-sing for _ol
_ae
y un()not u _ear
g(ut)odi’
si_ence
गोदी की ज़मीन की खाक छनेगा
एक()नेक सास अपने अदर के भरपूर कख से
कितने कख है भरपूर के दामाद के अदर
आधे की बंद आँखों की नुमाईश की है फरमाईश भरपूर चाहे एक ख्वाईश
असुरो को ख़ाली बिठा के अब बांधे है गोदी मे समाने की गुंजाईश
अब क्या वा()धे के आधे से शा(त-ब)दी करोगे
फिर उलटी टांगे डालेगी भगड़ा गोदी के आसमान मे
hang_ed _an
दुनिया की एक सास का वास
नही शामिल गोदी के अंदर का उपवास
ख़ाली हो गोदी का सारा निकास
आधे की एही प्यारी प्यास
कब खुले बूंदियो की ख़ाली आस
आखे उठाने से दामाद की दुनिया भी
उठ जाती है
और आगे की खड़ी है त्यार
उठने को अदर यार
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