बाहर के लोगो को कैसे अंदर का काला मूंह दिख जाता है
कालक पोतने को नज़र लग ही जाती है न
तुम-तुम लोग a-li_n होते है दामाद की दुनिया के अदर
भरपूर मूह दिखने से सास का दामाद काबिल भरपूर रहता है
बाहर के लोगो को कैसे अंदर का काला मूंह दिख जाता है
कालक पोतने को नज़र लग ही जाती है न
तुम-तुम लोग a-li_n होते है दामाद की दुनिया के अदर
भरपूर मूह दिखने से सास का दामाद काबिल भरपूर रहता है
भरपूर को भरपूर पेरो पे खड़े जो के दुनिया के भरपूरो के साथ रहना है
(no no i am no 1)
भरपूर पढ़ाई करनी है
यह तो बतियायो की दुनिया के पैर कहा है
बीमा()त्रियों के साथ भरपूर gut की ज़मीन पर तो खड़ा ही नही हो सकता
समय को नही मिलता भरपूर दूर से ही नज़र नही आता
_h@ un-i-t-y a damad’ _ation _ill _av
_ere e-very1 is co_pet-ing to
be #1
असुरो की बैठी हुई सेना तो
भरपूर बहु-तो ने देखी होगी
आनद ने भी भरपूर आखे
खोली भोगी
y abs()nce g()ow s()ong-er
for भरपूर to _eep f_lling
for भरपूर _@_@
भरपूर मे()मान के बहाने भरपूर को भी
भरपूर खाने को मिलेगा नहीं तो
रोज रोज नहीं मिलता येसा भरपूर
समा आयने भी भरपूर बटोरता
बा भरपूर काम के आयने
कैद करके काडे करडे काटते
बिंदी खड़ी करने की लात नहीं मारनी
आती सास को और पेरो पे खडे
होने की खडी बाते बनाते बा
खडिया बुनने से भी बैठा
बा बकटा बा
y in()id u _lae is an emptee
com_on()n’t of self-car for
y in()id u need to s_op
sp()eading full_ess
within _ap of nature
सूखे पड़े हुए गोदी के भुयें
भरपूर घर भूखे भाड़े भय मुये
न मिले यानि तो घूरे ग्यानि
न उतरे अंदर सीखा सूखा
सा सयानी
a भरपूर cre_ation is y on s_or()y
to end within lap of nature
no()thing to()tal _or()y
sim(pal)ba
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