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इधर उधर लायो_iddle
सास भरपूर _iddle
अदर ही भरपूर एक_iddle
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इधर उधर लायो_iddle
सास भरपूर _iddle
अदर ही भरपूर एक_iddle
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ख्वाबो को आगे लाने वाले
नवाबो के पीछे भले चलने वाले
सास के अदर ही भरपूर ढलने जाले
बाहर क्या है अदर ना भूले ताल के
भरपूर मतवाले
भगवान एक
और भक्त अन्ने नेक के भरपूर टेक
फिर रखो आखे क्या नीचे फेक
कहा है बिंदी का ख़ाली रास
इधर उधर
अंदर बाहर
भीतर एहसास
छोटी सी चाबी से पूरा घर खुल जाता
भरपूर सास कितना (खु-घु)ला भाता है
क्या मे()मानो को अदर बद करके आता
इसी लिये बाहर आखो का भरपूर छाता
तूतू मे मे की दुनिया के धर्म स्थानो के अदर का
भरपूर दिखावे का बाहर आदर
भरपूर घर के अदर का ख़ाली भरपूर आ-दर
ज़िन्दगी की श-रते सुबह को रगीन हो जाती है
दोपहर को सगीन सग आती है
शाम को भरपूर तक़रीर सुनाती है
राते भरपूर भर भर गम घोलती है
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बाहर के जग के आड़े को अदर ला के जुगाड़ को बाहर धोते है
जग जग जियो तूतू मे मे लाल के रटे रोते है
यानि की एह लो
ख़ाली मान लो
ध्यान नहीं है
निकाल दो
आखे गम है
रुमाल लो
सर पे चढ़ा ले
बाल पहले गिरा लो
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