भरपूर कि-राया

एक दिन एक दिन एक दिन
एक दिन गिनते रहते है
राते क्यों नहीं गिनते
अनगिनत

क्या

जितना कहा उतना ही बोला
उससे सास को ख़ाली सीधा बेसमझ आ ही गया तो बोला
कौन
भय रोया भरपूर किराया भोला

भगवन रात को सपने मे आते है
और दिन की हक्क-की()कत अदा आरते है

पता ये

सास को _t& लेना पड़ता है
_heel के धोने को दहा()ड़ने के लिये


न ज़मीन पे बैठ के नहीं रो-रेग सकती

ਅੰਦਰ ਕਿਥੋ

ਜਦ ਸਾਰੀ ਉਰਜਾ

ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਇਕ ਭਰਪੁਰ ਦੀਆ ਚੁਗਲੀਆ ਨੂੰ ਤੇ ਰਾਤ ਦੇ ਭਾਂਡੇ ਭਰਪੁਰ ਛਾਨਕਾ ਨੂੰ

ਰਾਤ ਦੇ ਭਰਪੁਰ ਜਗ(ਦੀਆ)ਰਾਤਾ ਨਾਲ ਇਕ ਇਕ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦਾ ਮਜਾ ਹੀ ਭਰਪੁਰ ਭਾ


i am _i-red ਤੇ ਹੋਣਾ ਈ ਆ

ਹਾਯ ਨੀ ਮੇਰਾ d_son
ਪੈਰ ਚੁਕ
ਸਾਰਾ ਦਿਨ ਘਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਪੈ()ਰਾ ਦਾ ਗੰਡ
ਖਿਲਾਰੀ ਅੰਦਰ ਆਦੇ ਆ

बस-y

भरपूर सास के दामाद की अदर की एक-एक न-फरत की दीवारे


gut के अदर भरपूर भू की कंपनी से गिरती है


सास का दामाद एक एक कपनी पैदा

करने मे भरपूर बस-y है

ख़ाली घर

मौत के बाद का ख़ाली घर अगली सास मे

ख़ाली याद भरपूर रहता है


as y-0-s sae it’ a _mall wor_d

co_par 2

कलयुग का चक्र तो बहुत छोटा होता है

सास को कहा याद रहेगा आगे पीछे का रोकड़ा

बीमा(या-ला)रो

गोदी के अन्न को इज़्ज़त से स्वीकारो

नहीं तो अदर ही महाभारत भरपूर (मा-वा)रो

उससे क्या होगा किस(ी-की)मत के भरपूर सितारो

आधा जन्म भरा रहेगा दुनिया के एक राज(बीमा)ला-रो

बायी बाई

t-v पे बरतन के तल को चमकाने वाली बाई है

इसी लिए सास का दामाद भी भरपूर बायी भय

भरपूर वारती उतारो मगल-मारती भरपूर मय

ग्रहो के अंदर ही गहरी ()वायी भरपूर लय