कल का आज अस्तित्व

एह लो बन गया कल का आज


भरपूर घर से बाहर निकालता है ज़ुबान को सास के दामाद की मौजूदगी के लिये
ज़ुबान भी इधर उधर देखे सहायता की दहन को लिये
दामाद के अंदर की भरपूर लीला को मिले भरपूर विरोध के गिले
अब सास क्या करे भरपूर दामाद की ज़ुबान जा जोड़े ज़िले
आधा भरपूर दामाद चखे-रखे और आधे मोड़े या ड़क्के


gut गोदी को अन-सुना करके देखना एह है की असुरो को कितना

ख़ाली भरना पड़ेगा बिना अन्य-दाज़ चखे


जिस युग में भगवान भी देख के ख़ाली रोआ है

_oor _ast 10s आखे अखे


अब भरपूर काअस्तित्व नही है ख़ाली अस्थि भी भरपूर देखे


तो भगवन का सहयोग भी नही होगा ख़ाली मौजूदगी का विरोध

इसी लिये भगवन भी गोदी के बाहर ढूंढे gut ब्रह्माण्ड की मौजूदगी का वियोग

कब तक बि(ल)खेगा gut ब्रह्माण्ड की चाल का ग्रहयोग


(पता है आधे को सोने नही दिया रा ने ख़ाली रात दर)
कल को आज
कल को आज
कल को आज
बस कर आधे
हाँजी बूँदा मईया

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ख़ाली बूंदियो की ख़ाली gut मईया

10-10

01-01

बाहे ख़ाली फैलाने से ख़ाली धड़ अपने आप उठता है


(हवा को ख़ाली चूमने को)


gut मईया की बूंदियो को ख़ाली गले में उतारने के लिये


जैसी gut मईया झुक के देखती है गोदी में बूंदियो को


बूंदिया भी रुक रुक के झुकती है गोदी की आँखों में gut मईया को

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