तो-तुली

आधे तो gut की tot-al माँ(की)मूली है

इसी लिए गोदी की आग ख़ाली बबुली है

अंदर बाहर बोले ख़ाली आधे तो-तुली है

भीतर न समझे ख़ाली भू ति-तली है

आखे दिखाओगे तो ख़ाली की

भरपूर बिजली है

गन-दगी

सफायी पसंद भरपूर को अदर के

सास के दामाद की गन्दगी की गन-दगी

की खुशबू दाग बाटती और दगी

फैलाती भरपूर साफ़ है

आज तो भरपूर घर की चकमक की

मक को क्यो कहन्दे