y _ell-b()ing is
(he-s_e-we)al-thy
u-()odi-()ind
so th@ _hich is pa_t
_ill _eep b()ing out of
y in()id u b_ast
& th@ is _ood thin_
y _ell-b()ing is
(he-s_e-we)al-thy
u-()odi-()ind
so th@ _hich is pa_t
_ill _eep b()ing out of
y in()id u b_ast
& th@ is _ood thin_
कितने जन्मो के अंदर आधा
एक बलवान रहता है और
शुन्य जन्म में तो निर्बल ही मिलता है
शुन्य जन्म मिलता नहीं
gut गोदी के अंदर ख़ाली ढाल के
अपने आप शुन्य साँस
ढल जाता है
कोशिशे तो बहुत होती है
जीवन व्यतीत करने की
(व्यतीत क्या करेगा अतीत के अंदर
ढूंढते ढूंढते थैंक जायेगा)
पर क्या करे
पहली बात भरपूर तो नाकाम है
और पहली बात भरपूर तो व्यस्त
है तलवे चरने में
अब एह लात तो सीधी है
कोशिश के अंदर भी सीधा निकला
बाहर भी सीधा
टेढ़ी कोशिश काम नहीं देखती
फिर भरपूर ने कोशिश की
रेखा को कब देखा
असुरो का अधर्म भरपूर भय आ अंदर भय-भीत भरपूर बहाव बाहर बहा
हाथी जंगल में अकेले ही चलता है
इसी लिए भार का च-लान आसान ख़ाली होता है
आधा जन्म का एक अक्षर पड़ने से बनता ह एक जन्म का
एक विद्वान
हर जन्म में नहीं होता भूमि निधान
सबसे छोटी और सबसे बड़ी सजा को कौन भरपूर साज के सजता है
आधा जन्म
दुसरे विचार को जिन की दगी पे दाग लगाने से निकाल ही दो की कुंजी है
जुबान और कर्म को ma()ch कैसे करते है
_h@ev-er quan(li)ti()y g()owth me-a-su()red bie
a qua-lit-y err in()id u in on his()or-y of man-y wor_d
in()id kal_uga is to con()rol ever-y-thing
in(out)id gut nature
अब एह क्या है
मुह में रखने वाला मूरख होता है
और बाहर बोलने वाला बुद्धि का भरपूर मान ढ़ोता है
क्या है यह तूतू में में की दुनिया
अच्छा अच्छा
मुह के अदर भी तो भरपूर मूरख है ना
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