तकल्लुफ का असर भरपूर असुर बहेगा
भरपूर आधा जन्म में भरपूर ही रहेगा
जातो के भेद मर्द भाव पाता ही रहेगा
कल का मातम आज की गोदी भरेगा
बूंदियो ने इज़्ज़त गवाई कोई न रोया गड़ेगा
बिलखा रात का साया भी न सोया दिखेगा
आखो ने गोदी गवाया बूंद बूंद न बिखरेगा
तकल्लुफ का असर भरपूर असुर बहेगा
भरपूर आधा जन्म में भरपूर ही रहेगा
जातो के भेद मर्द भाव पाता ही रहेगा
कल का मातम आज की गोदी भरेगा
बूंदियो ने इज़्ज़त गवाई कोई न रोया गड़ेगा
बिलखा रात का साया भी न सोया दिखेगा
आखो ने गोदी गवाया बूंद बूंद न बिखरेगा
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i.e
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em_tee re()illed
ਕਿਨਨੇ ਚੋਰ ਸਾਹਾ ਦੇ ਤਲ
ਦਾਮਾਦ ਨੂੰ ਵੱਟ ਪਾਂਦੇ ਸਾਮਨੇ ਆਖਾ ਮਚਲ
ਜਿਸਲੇ ਅੰਦਰ ਜਾਇ ਆਂਦਰਾ ਫਿਸਲ
ਮੂੰਹ ਵਿਚੋ ਨਿਕਲੇ ਟਹਲ
ਭਰਪੂਰ ਭਾਣਾ ਹੈ ਪੂਰਾ ਇਕ ਮਹਲ
ਦਿਖਾ ਦਿਆਂਗੇ ਪੂਰੀ ਚਹਲ
ever-y-thing _ver _ow-er
each _other
nothing _ant _ive 2 in
y _ake awae’ are so co()on
a to()tal _hill adhe will c_ill ever-y1 to
_it2_il ha_f emp_ee in()id
do_e hol on e_il
एह-यह इश्क नहीं आसान
सांसो का है ग़म घोर तूफ़ान
काळा बदलो का घन घन घान
धीमे धीमे मचाये रेल का ख़ाली मचान
a on _an’ err is ex_ecting _ol ma_ner for
u be()avi() is y sav()i() of in()id
i-ne()tia ge_er-ate y s_an_er
कौन सा सफर तय करना होता है सास के दामाद को
y फेरो के भरपूर सर का बिना
बताये भरपूर वर का
मर्द क्या होता है
मर्द से पूछो
जो अंदर के भरपूर ईंट को बाहर दिखा के
अंदर नहीं लूटता है लेके जाता सास का
लोटा आधा जन्म खोता
दुनिया के भरपूर मर्द
गोदी की शम-शान के
मातम के भरपूर लायक ला लक लक
भयानक नाक का नायक भा भी बहा नक नक
सास भी सहे भरपूर साझ सक सक
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