()here is mor y()s going o_n
in()ide than _ut y()s out()ide
meet u-eie will _up()press _ow
y()s feel in()ide den_
()here is mor y()s going o_n
in()ide than _ut y()s out()ide
meet u-eie will _up()press _ow
y()s feel in()ide den_
सवा(ला)ल यह नहीं की आप को
गोदी की बूंदिया नज़र आती है की नहीं
लात की मज़ाल एह है की
आप की आँखों के अंदर
एक बूंदी ही तमाम करती है
सास का भरपूर यार
hav u b()each()-ed within _et
गोदी में आज भी ओइ रेंगता है
सांसो को ख़ाली सींचता है
ज़ेह-पीली आँखे फेंकता है
अदि का भाग आज भी
सांसो के उपर ख़ाली तैरता है
कब तक आँखों के पीछे भरोगे
भरे हुए भी इधर उधर रोज पड़ेंगे
जो सामने आता भीतर भिड़ेंगे
इसी लिए तो
सीधा हे मानो
अंदर जाम ख़ाली खेलेंगे
y() life in()ide u is y()s to serve u-bodi’ mind are y()s ser()ing gut surface()all world
a y() va()na is cunning y() sa_()iet-y
&
_ome s_ee a-lon h()it-y
की तुमने आधे के मुँह से सुना है कभी
an emptee intentions within _outh
&
within lap of nature alon _outh
गोदी में बूंदियो के मुँह होते हे ख़ाली बंद
आधे की देह की तेह जब ख़ाली होती है
तब to()tal देवी की काली आग आती है
आँखों को रात को रुला रोती है
पर एह क्या बाहर क्या देखती है
वा()ना
वा को ना नहीं भाती है
भरपूर हा सब को जगाती है
आप की सास का क्या नाम है
gut गोदी के अंदर
रोगी (रोग को लेकर रोता ही रहता है)
भोगी (भरे भोग के टीके रोज लगाता है)
योगी (दिन रात योग सताता है)
an emptee breath lie
_tr8 o_n f@ emptee _round
गोदी तो आधे ही होगी
आधा तो है रोगो का भोगी
योगी को क्या पता कब दस्तक रोगी
गोदी तो आधे की ही होगी
wh@ is o_n()ine con()ul()tation
जिसमे आप को अपने बोलने का भाडा भरना पड़े
फिर आप भाड़े पे क्यों लेते है इधर उधर की क्यों
सीधा तो किसी को समझ मैं ही न हीं आता
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