जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
सृष्टि गोदी की जननी का पूर्ण ज्ञान साँस का ख़ाली स्वर्ग (स्वर का गर्ग) संपूर्ण वर्ग
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
सृष्टि गोदी की जननी का पूर्ण ज्ञान साँस का ख़ाली स्वर्ग (स्वर का गर्ग) संपूर्ण वर्ग
for u _in’t e*/i()ence no()thing
_et to com in()id o_hing
wit_in _ap of nat-ur to()tal s_ing
tran__end in(out)id em()tee _ing
a s_ern @tu()n be_o-me _ated re_lit-ee of in()id _urn
for _e_t_une to a_in wiw o fe()n
as nothing within so without ever-i-thing
as ever-y-thing in()id so out()id nothing
no _@ter ever-y-thing u cre_ate f()om in()id _ind_ull_ess _ound
to()tal nothing re()_on-ates wit()in aum()tea ()ound
आधा जन्म का एक (आ-जा)ना तो आगा ही रहेगा
शुन्य gut का भु(आ-ला)ना भरपूर एक-एक को ख़ाली रुलाएगा
हर आधा जन्म में
गोदी मईया रा १ आया है
आधे ईतय से आदि आरणि आ
0 mae _is em()tee f()og
_h@ is or-i_inal _orm of _abi?
काल्की बिछाए ख़ाली आधे पालकी
दुल्हन की सृष्टि ख़ाली गो()का लाल की
डोली की ढाल अंदर ख़ाली लकीर धरो की
ख़ाली उठाए साँस का सौभाग्य चार कंधार की
भीतर ही तरी ख़ाली साँस उद्धार की
आधा झांके हाँजी हाँजी ख़ाली रजा उध्हार की
भरपूर सास के अदर का एक-एक का अंत ही
पूर्ण एकांत
सारा गोदी का ख़ाली सिध्दांत
आखे हुई पूरी मृतान्त
मूषक राज की स्वा()री है महा विद्या की ख़ाली आरी
धीरे धीरे गोदी मे आए ख़ाली गंध की राज दुलारी
गोदी मे सारी खिले अदभुत ध्यानी की ख़ाली क्यारी
दिखे जहा जहा वहाँ है सृष्टि मईया की गोदी प्यारी
ख़ाली सांसो को दिखाना-सुखाना भी क्या जरूरी होता है
ल-लो लान लो
गोदी का ख़ाली ज़माना भी सारा पुराण माना ख़ाली होता है
भीतर ही बहे ख़ाली आम सारा संसार धोता है
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