यह-वोह

यह क्यो नही पडते वोह क्यो नही लादते
ये क्या पहना मेरे वाला मत क्या दहना
कितने क्यो अदर ना यू
बाहर बिखाये बतर त()र बू

सुहाना दिन-रात सफर
सासो सा सुदर ददर
इधर उधर के अदर मै डफ्फर
तेरा यू बाहर बूहे रफू चफ्फर

तूतू मै मै को मेरी चहुत चिता चा
जुबान जे जोड़ी जिनका जता जा

जाहिल जान जहान जी जू जान
जय जय जिले जो जताये जुबान

a to_ 2 _on

सोने का बल मत y-0-s inid
u is _aving भरपूर भा()राम


सृष्टि गोदी तो कभी सोई सी सही
ना कलयुग के कन्धार कही


हर रोज दिन मे भरपूर _uc_ear a-tom
और रात मे सपनो की _um _ar _a-ton

अब ज़मीन जे ज़ुबान जी जुस्की जुकली जक्ली

ख़ाली र()न

सांसे बहलाए ख़ाली चच्चे चहलाए अंदर ()रन
सांसो का ख़ाली ध()म सहलाए गोदी का सन()तन सरन


दुनिया का एक एक सरपूर सू-रमा ना सू सके
गोदी की ख़ाली सुरमई() अंदर ख़ाली सर-मा()आ

अंदर-अदर

गोदी के संसार के ख़ाली अंदर
दुःख-सुख तो बुँदियाँ ही दिन-रात पि-रोए
पाओ पोए परे पट खट खट खोए

बुँदियों को ना मिले मझधार
गोदी में तैर तहा तरपूर तिरदार
काहे का कंधे कुम्हार कहार
निवाला अदर नीवा बाहर बीमार
नि-ठले ठयू ठहरे उ उतरे उठाव