ख़ाली खो-परे-श()न खोपड़ी खार खड़ा ख़तम खान
Author: mandalalit
दि-खो
बहार की आखो की ()मत अदर उलझायो
सारथी अंदर निरा()रथी साथ निभायो
देखा खोखा
आँखों देखा न ब्यान कर पाई
अंदर ही घट घट घड़ाई
राट काली घटा घायल घाई
दिन न थमा थमी रजा रुला राई
ਡੇਰਾ ਡਰ
ਘੜਪੂਰ ਘਰ ਘਿ()ਰਨ ਦੁਇਆ ਦੜ੍ ਦੜ੍
ਤੇ ਖਾਲੀ ਖੜ ਬੰ(ਨੇ)ਜਾ-ਰਿਆਂ ਬਨ ਬੜਾ ਬੜ
क्ता
१ सास ० जागरूक्ता
भरपूर भाग भुक्ता
इधर उधार ज़िन्दगी चुक्ता
गाठो गाथा अदर मूह मार मुक्ता
गुड गयी
गड-डो के गूपर गाडी गल गायेगी
गड्डो गे गडर गेसे गाल गडोगे
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s@t_ic _ood’ _ol co_pro-mi_e_ _via
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ਰੁ-ਲੋ
ਰਾਏ ਰਬ ਰਰਦੇ ਰਰਦੇ ਰੁਰ ਰਏ ਰੁਨ ਰੈਨੇ
ਸਫੇਰੇ ਸਫੇਰੇ ਧਰਤੀ ਮਾਂ ਨੂੰ ਸਿਖਾਂਦੇ
ਧਰਮ ਧੀਆਂ ਧਰਾਯੀਆਂ
ਬੋਲੀ ਬੰਦੇ ਬਰਾ ਬੁਕਾਯੀਆਂ
खास
ख़ाली सांसो की-म()-की का एहसास
कैसे आए अंदर ख़ाली रास
माली मटकी महा()पवास
ग-यीया
दुयीया के असुर एक एक के सगे
और अपने अदर गाठो के गडपूर (द)गे ग()डे
पीठ पीछे पूरी पा पडायीया
सामने साये सरूर सडायीया
घेसा घुमाये घूघर घडायीया
जन्म एक ()धार अध-()डायीया

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