आत्मा ज्ञान घाट घो घोट घोट घूँटता
एक सच सूरमा सराय साया सूरता
को क्या
आत्मा ज्ञान सच सही सोता
मुच्चा मोती मोटा मोटा
आत्मा ज्ञान घाट घो घोट घोट घूँटता
एक सच सूरमा सराय साया सूरता
को क्या
आत्मा ज्ञान सच सही सोता
मुच्चा मोती मोटा मोटा
एक दिन आधा जन्म का ऋण
आधी रात कलयुग कारी कात
शक्ति को पाठ पढ़ाते
जननी जन जन जाते
रस्ते रटे दगी डटे दाते
दिन-रात भर भिखाये भाते
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एक दुयीया के जहा()ज कितना शोर मचाते
उडते असुर अदर भरपूर भराम भाते
बारी बीमायारियो के बुराम बरसते
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_art of भरपूर n@ur is to loo_ @
bot_ erring si_es of ever-y1 su_ject
_hi_ch par_ of na_ur is b(i_th)rit
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loo_s li_ na_ure’ ca_l 0 re_id in()id
भरपूर n@ur _urge wit_in/wit_ out
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असुरो के पडपूर पसरे पेरो पी पादर
(चौ)पदी ()रण ची चादर चे चम्बी चढ़ी चा
su_t_ing for ever-y1 is 1 _hing
0 po_nt _ale _ing
आधा जन्म की जली जय जुबान की जातो का जाडा जुलाब जहाना
गोदी आधे आ नाम नया नया नाता
an em_tee b_eat_ing ob_ec_ive is wiw o _o()tal _i_ence
hal_ ye_ ha_f no 1 p_o 0 g_o
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