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Author: mandalalit
अच्चुतम अनजल
आने वाला है ख़ाली कल
बने आज का ख़ाली जल
गोदी में ख़ले खरूर निर-जल
बूँदिया अंदर आरे ऊज्ज़वल
सासो के अदर
सृष्टि मईया की
शक्ति को दबाते हो
तो गोदी बत्तियायेगी
बैठा है आधे समाधी में
होती है आबादी
आधा आधे
ख़ाली आदि
पाम पिवाला
भरपूर मौज मस्ती भरपूर आराम
आधा आस-पास ३ पहर परम पवन -ज्ञान
आधे न मिला दो दक़्त दा दिवा-ला दान
काटो काटो
पता तो पले नवाब ने नाम न नले
पेड़ो का भविष्य आज का शिष्य
काट के कारा गाठ गा गारा द्रिश्य
क्यो कही का भविष्य भरो
भरिया()ली का भिकता विश्या
s_eak hal_
i do _av f_ee_om to s_eak
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min_ & _ol_um bo_i inve_t
आधा इधर – आधा उधर
कितने दिन साधा साफ़ सिया
(भरपूर भहकाने मे भगे भो)
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as abov so b_low
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as be_ow so a-bo_e
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दाधा दाम
दाने दाने ले लिखा है खाने वाले का नाम
दाना-दाना तो गया मिट आ आधा ना()म
खोट खट खट खाया खाम
नीली नत ने नहाने नाला नाम
नीला

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