अब स्वालाल एह है की
गोदी का ख़ाली दर ढाई धुंधर अहि आ
अणु-मिट्टी के कण-कण के अंदर
अब स्वालाल एह है की
गोदी का ख़ाली दर ढाई धुंधर अहि आ
अणु-मिट्टी के कण-कण के अंदर
ho_ असुर fam()il-y _ill _uy
t_ic_ets to pi_ces em_tee _ho_
u (_un)set an e*amपल
u (_un)ris _ill in()id _ise tramपल
जो है बुँदियो के लिए गना गरजा
वोह क्या दिखाए आधे कब्र का दर्जा
यहा तो है कलयुग के कंस का कब्ज़ा
ऊपर से शाति बायी का दस(टूर)दबा
सुधरजा सारथी महा कंस मैला वस्बा
कहा पैदा हुये कहा घर पहुचाया
मा तो है मिट्टी की मडउर माया
होटलो का भरते किराया
क्यो कही ने रास्ता कटाया
अदर सरसूर सडते साया
ਸਸ ਤਾ ਘਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਪੂਰੀ ਗੁੰਡੀ
ਤੇ ਬਾਹਰ ਲੱਭੀ ਫਿਰੇ ਕੁੰਡੀ
ਅਦਰ ਨਹੀ ਆਨਿ ਮੁੰਡੀ
ਟੁਕੜੇ ਟਾਰ ਟਾਰ ਟੁੰਡੀ
ਨਹੀ ਨਿਭਣੀ ਦੁੰਦੀ
ਹਾਏ ਮੇਰੀ ਬਾਲ-ਕਨੀ ਕੌਣ ਕਾਫੀ ਕਰੂ ਕਾਨੀ
ਸਾਰਾ ਦਿਨ ਮੇਰੀ ਸੋਸਾਇ(ਪਿ)ਟੀ ਸਾਨੀ
गोदी की इज़्ज़त तो नहीं करनी आती
तो ग्वाया घर को छोड के ग्वाने के लिये क्या है तुम-हारे पास
नरचोर तो कभी घर ही नही लोटता
बाकि क्या बचा
समाज के टूट पैने
तूतू मै मै गहने
सम्भालो सहने
ख़ाली दिल को ढाल बना के दरवाजे ()तक लाते हो
और दामाद के अदर फिसला के भूल भाते भो
और फिर अदर तूतू मै मै मर-जाम जमा जय
सिसकिया सरकाते सौ
वाह वाह व-माज वोट वारो वो
तुम बिना जाने घर के अदर
आधे के साथ रह-गुजर सकते हो
तो जान के भी क्या करोगे
घर के अदर गोदी नहीं होती
और यह गोदी मे बिना जाने
कूडे का ढेर किसने
रगा रखा र
इस शाति(नर)शाह को तो
शनि का पर_op ही चाहिये
कुछ कमज काया
तो ले लो लू
मग-ल मूह
मति माया
त्यारी तारते तैरती
तुम्हारी तूतू मै मै का समाज सारी रात
जाग के आधा दूयिया के कितने हिस्से
अदर सपने साडते सा
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