s_eet _alt

4 to 5th house
cancer की मौत को छू के leo
अदर cancer नही बनता
दाग अदर बाहर दगता

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as it is ve_y f@ f_ult

who e@s sa_ty 1 pro_ein
0 _eed _weet su_ar car_o_y_r@e que_n
_ire _ome _een

b से बडा बरपूर प्यार

शाति बायी को है बेसबरी बी से इतजार
कब आधे घर से बाहर निकले
सुने फटे फाल फटकार

ओ भगवन अब क्या यहा पर
भी आधा दिक-टेटर त्यार

चली आधे ख़ाली कब्र आर पार

आधे साँसो की हो रही नीलामी
नरकासुर के अदर नही है कोयी उलामी
खूले-आम होगी अब तो बदनामी

अपनी कोख के अदर बाहर सब करते
li_e & dis_ike

6 कानो को सीखा रहा है कब से
लेकिन कभी जुबान ने होने नही दिया पार पडपे

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_um1 is _acking ne_wo_k