चल चल चालू

तुम क्या इतने ही भु()क्कड़ हो की गम को पता ही नही
वसोइ वी वस्तु अदर है या शौचा-लू मे जडी जही

तुमहारे घर घ असूल है
दूयियादारी दबल दबूल है
वस्तु वास वडापन वसूल है
क्यो क-वारी कबूल है

पो()शन पा

तरपूर तूतू मै मै यमायी ये यारियो ये बीमे बारो
और बीमा(या)रियो बे बरपूर बन()दर बूटायो
इलाज महु()त माली महगा मालूम मा
अब आया अत-रिक्श शय्या शा
आधा जन्म ज(ली)ही झुका झा
कितना करपूर काया का


होता-2

देवी का घर नहीं होता
तो लूटते तहो तोता
और जाडो जहा जोता

घर ले अदर देवी नहीं आती
घर के अदर तो श्री ल(क्ष)जी समाती

घर की रसोई मे मर-दान-गी झाडने झी झजा
खून की रगो मे आधा जन्म का करपूर कजा
मर-द मुडे सामने इधर उधर न्योता नजा
और पीछे खलोता खुजला खजा