आत्मज्ञान की हत्या से मुक्ति की आँख नही खुलती
is th@ co_ing f_om deep wi-thin
आत्मज्ञान की हत्या से मुक्ति की आँख नही खुलती
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दुयिया-समाज मुक्ति
an em_tee _ut im_un_tie
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for no 1 _as ho_
priv(y)il()ge
in(out)id सख्ती
जन जन बाहर लोटा दुयिया अदर घला घोटा
गला गोटा भला भोटा
तू बूढ़ा मै बचा शाह
सौदा समाज सच्चा साह
गन्दगी अदर आशा नि()चाह
वह वोह वारपूर वाह
तूतू मै मै ने निसने नाता नोडा
समाज सा सुधार अदर निगोडा
जहा जहा तूतू मै मै की जुबान वही
होती प(द)ढाई जन जन की पहचान
आप ने हम से शादी करके तुम
पैदा किया तूतू मै मै का समाज
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y-0-s in()id u mo_ning _ice
(he-we-ste)al-thy yie_
_y ni_ tu_ned th_ice
wit_out o_er_ooking
आधा जन्म hoo_ing
घर घी घसोई मे अग अग क()जी झडने से
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खाली अनु अंदर खाली मईआ
परमा(अ)णु पु()वईआ
परम()नन्द पईआ
कीटानु जन्म बाहर नही लगता आधा-एक फैलने मे
और आधा जन्म अदर नही मुकता एक कीटानु सभालने मे
ले आयो अगले जन्म का आधा-एक कीटानु
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_ie_an 0 _an
आधा जन्म जही जगता कल के किटानु कैलाने के
और सास सोते है कीटानुयो के ढेर मे सपने सजोते से
स्वच्छ बाहर तूतू मै मै स्वस्थ अदर मेरी जुबान का स्मा(दा)ज
तभी तो आगे बाहर बूडेगा आधा जन्म अदर लुडेगा
घर के बाहर क्या कमाया पडपूर पडायीयो पाया
दामाद ने चार चाद(रे) चुनौती चमकी चाया
घर अदर छाडि छडी छाया
ले ते(मे)रा मुक()मल माया
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