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thae sae ()utter()li has wing_

तितली उडी
उड़ के चली

(आकाश में उड़ के कैसे चलते है )


भवँरे ने कहा आजा मेरे पास
तितली कहे मैं चली आकाश

तितली नहीं फिसली

ना ही फिसला भंवरा

हवा ने लिया चुरा

उनकी आँखों का कजरा

अब बैठे है छु के हर साँस का

अधरा

अधरा

अपवित्र

gut मईया की कोख के पवित्र

दिन रात के अँधेरे को अपवित्र

करते है वासना भरी सास के साथ

वासना से भरा मेहमान भगवन का रूप होता है

सुन लो लत

कितना झूठ लिखते है

भगवन का नाम लेने से दुख दूर होटल होते है

gut गोदी के घरो के अंदर वासना का होटल तो आज भी खुला है

un()not i-mag

ਜਾਕੋ ਰਾਖੇ ਸਾਈਆਂ ਮਾਰ ਸਕੇ ਨਾ ਕੋਈ

ਕੀਦੀ ਰੱਖ ਨੂੰ ਕੋਈ ਮਾਰ ਨਹੀਂ ਸਕਦਾ

छुप छुप

कब तक छुपा के रखेंगे

कल तो पता चल ही जायेगा सब को

आधे का कल कभी नहीं आएगा

gut मईया की साँस को

रोक के बैठा है आधे

आधे काय()नात किसी भी

esca()lation मैं

आधे थक गया मांग के मदद

किसी कान तक नहीं पहुँचा आधे दर्द

उठा

नंगे हो के गोदी का पत्थर उठाओगे


तो पत्थर भी शर्मा के बैठा जायेगा

असुरो की शर्म मैं उचाई की कमी हो रही है

इज़्ज़त

क्या तूतू मैं मैं की इज़्ज़त

gut गोदी के अंदर की

ख़ाली मईया से भी

ऊँची होती है

इसी लिए भोगी को वास की जरूरत होती है

सास दिन रात रोगी होती है

रो रो कर भी उड़ती रहती है

उड़ने का भोग भी संजोगी होती है