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g(ut)odi’
si_ence
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गोदी की ज़मीन की खाक छनेगा
एक()नेक सास अपने अदर के भरपूर कख से
कितने कख है भरपूर के दामाद के अदर
आधे की बंद आँखों की नुमाईश की है फरमाईश भरपूर चाहे एक ख्वाईश
असुरो को ख़ाली बिठा के अब बांधे है गोदी मे समाने की गुंजाईश
अब क्या वा()धे के आधे से शा(त-ब)दी करोगे
फिर उलटी टांगे डालेगी भगड़ा गोदी के आसमान मे
hang_ed _an
दुनिया की एक सास का वास
नही शामिल गोदी के अंदर का उपवास
ख़ाली हो गोदी का सारा निकास
आधे की एही प्यारी प्यास
कब खुले बूंदियो की ख़ाली आस
आखे उठाने से दामाद की दुनिया भी
उठ जाती है
और आगे की खड़ी है त्यार
उठने को अदर यार
ख़ाली सांसो की gut मईआ अलग करके
भरपूर रिश्तो की तो भरपूर कदर होती है
तूतू में में की रोशनी की दुनिया में
असली gut गोदी कहा है
रात अंदर
तूतू में में की दुनिया में भरपूर कम(आ)यी
की कीमत पूरी नहीं सारी है से
बीमा-यारिया साफ होती है के गहरी
होने से भरपूर यात्रियों के दुख सुख में
भरपूर शामिल रहता है सब को
एक बना के रखता है
gut मईआ ने आंखे बंद किते ही
सास को पल-पोस
के बड़ा कर दिया और सास की
आखे तो खुली ही रहेगी आधा जन्म
की उंचाईया की गिरावट मापने के लिये
फिर बड़ा को ख़ाली कौन करेगा
तेरा भरपूर ख्वाब
पभी पूरा पो पाया पय
तुम-हारे आधा जन्म के भरपूर अदर
की मौत तो भरपूर पैदा होने से पहले ही
तय है नहीं भरेगा आज का भय
ख़ाली तैरेगा गोदी के
अंदर ख़ाली लेय
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