तूतू मे मे की दुनिया का एक तो मा-बाप को भरपूर सीख दिखाने के लिये पैदा हुया है
उससे अदर का भरपूर मा-बाप बन ही जाता है
तूतू मे मे की दुनिया का एक तो मा-बाप को भरपूर सीख दिखाने के लिये पैदा हुया है
उससे अदर का भरपूर मा-बाप बन ही जाता है
ज़ुबान की सुबह और ज़ुबान की शाम कितनी मोह है कव()याली
भरपूर फिसलन से मैच करते है स्वा()याली
y-0-s in()id u की हर बात भरपूर बल मत-वाली
सृष्टि गोदी की शांति भंग करने मे कुछ मज़ा ही भरपूर ज़िन्दगी का
यह-सास आधा के लिये
मुकम्मल है इधर उधर की आखो का तोहफा भरपूर इज़हार के लिये
हर सास के लिये जरूरी है काम के भरपूर वास की प्यास के लिये
छुप चुप के श्याम के अधेरे मे काम-ना है भरपूर इतकाम के लिये
भरपूर बोल बला है तूतू मे मे की दुनिया मे एक के अदर
जाये तो जायेगे कहा चूक-अदर
ग्रहो के घरो के पूरे मन-दर
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_ip a_on _rob_em in()id y-0-s _ud
do 0 is hol-y _iss-i_on for y-0-s in()id u pre_is()on
जब pre_ent मे यह हाल है y-0-s in()id u का
तब 0 की a_sence मे क्या होगा
s_am_ede
y d()vil is y-0-s in()id u de_ails
for no on no_icing in()id u-re()tail
अपवित्र असुर आधा जन्म के येसे _ift _rap है
जिसे कोई अदर से नही खोलना चाहता
और बाहर से _rap के _lit_er को देख खुसी-खुसी अदर ही जग()गाते है
ज़ुबान ही घूमती रहती है
इधर-उधर भरपूर -वार की तरह
शरीर तो सस्ते सास मे सोता है -यार की तरह
फिर कहते है घर को बाहर की सैर कराके भरपूर
जगाये है अदर इकरार फिरा
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