अदर बाहर ढलते

आज को अंदर गोदी का अच्छा-बुरा

सारा पता है ख़ाली बूंदिया ख़ाली

घरो में कुसकती नहीं है और

सास के दामाद को मर्द की ईंट मारनी है

अपने घर को अदर बाहर ढलते

भरपूर दम

भरपूर बा(द)जुयो में भरपूर दम हर आधा

जन्म में भरपूर जुयो को उड़ाते है

ज़माने को नज़र आया आज तक नहीं

ज़माने की आखे अभी व्यस्त है

कृपया थोड़ी देर मे समपरक करे

पिछले युग में भी पिछला ज़माना

आधा यहा लाना