द्वोपदी के पद की चादर का अनुमान लगाया जा सकता है या मापा जा रखता है
तो ठीक है फैलाते रहो पेरो की पक्की ईटे अदर
द्वोपदी के पद की चादर का अनुमान लगाया जा सकता है या मापा जा रखता है
तो ठीक है फैलाते रहो पेरो की पक्की ईटे अदर
0 का भार है y-0-s in()id u अदर की एक दुनिया के ऊपर के कधे बहुत ताकतवर है न
उठा ही लेगे
सब को मिलाकर कर एक ही हुये न
लेकिन सभी की 0 तो अलग अलग है न
कौन सुलझायेगा अदर
be_iving with on _ear in()id _aunting u _ear
for y-0-s in()id has nothing to do with ever-y1 c_ear
&
life goes on without within _eer
सास तो रुक ही जाती है कभी न कभी
असुरो और बूंदियो के बीच में मंथन
सृष्टि गोदी का अमृत पूर्ण समर्पण
काल रात्रि है मधानी का सारा दर्पण
और आधे बैठा है निचे ध्यानी
नीलपंथ अभी हुआ अंदर का ज्ञानी
कब ख़तम हो कलयुगा की भरपूर निशानी
सास को भरपूर दामाद के नंगेपन के दिखावे की हदो की सीमा का एहसास नहीं होता
(सीमा का बल-मत तो इधर उधर का सारा परिणाम हुया न)
जब परिणाम अच्छा है तो कहती है
i am blessed with on wor_d in()id
और जब परिणाम बुरा है तो दिखाती है
मेरे घर को खाली नज़र लग गयी
भरपूर कमजोर ही गयी है
भरपूर आशा और भरपूर निराशा
तूतू में में दुनिया की भरपूर एक भाषा
अपवित्र असुरो को किसी के ऊपर तक पहुँचने में कितना कष्ट होता है
लेकिन कष्ट निचे के अपवित्र को नहीं भूलता और ऊपर का रास्ता भरपूर स्थूलता
a _ail()red y-0-s in()id u are s_itching a weillage’ lining for
co_t of bodi to re_ain e*tra thick _ining
a la_guage th@ _hich is pa_t 1 can’t lea_n
let u s_eak un-con_ciou_ly y-0-s in()id u e*press-i-on
ਮਾਂ ਬੋਲੀ ਨੂੰ ਤੇ ਮਿਟਾ ਹੀ ਦਿੱਤਾ ਨਾ
आधे की ख़ाली आंखे श्राप है
अपवित्र असुर अदर के बाप है
इधर उधर के भरपूर आप है
बिन मा के बचे अदर के पाप है
आधे की ख़ाली ज़ुबान की साधना के अ()लाप है
जिसको सृष्टि गोदी की ख़ाली चुपी का एहसास नहीं
उसे अपने अंदर की शांति के परिश्रम का ख़ाली विश्वास नहीं
भरपूर सास के भरपूर दामाद के पास सब कुछ भरपूर है
बस नहीं है तो अच्छी in()id gut ख़ाली प्रकृति
जिससे सृष्टि गोदी के सुर अंदर ख़ाली सहज रहते है
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