र-सूल

तुम-हारो की भरपूर एक-एक की अदर की दुनिया

तूतू तरह मे मे बटी बुयी बही बा


यह मेरा घर का भरपूर सास का ससूल सा

इसमे तेरा तू बाहर इलाजमी लागू लोटा

तू _ic-अदर बाहर भरपूर c_uk-लोटा लगर

खै-रात की -तां

आधे को सृष्टि गोदी क्या खैर खी खै-रात की बातां में मिली है जो


तूतू मे मे दुनिया के एक-एक भरपूर भाटा के ज्वर जाचेगा और

भरपूर नको को ख़ाली नाट्य नचायेगा

घर के अदर भरपूर मेहनत नहीं माती तो इसमें किसी

एक को एक ही क्या पायेगा

सानु की

y-0-s in()id u vo_can_ is _ancing 0 er_pting

_est un_ing sur_eal

गोदी के ख़ाली दिन रात की ख़ाली सच्चाई को अनजान के भरपूर जान
अन्न को भरपूर ज़ुबानो के नाम जनाते जा
y-0-s in()id u की बनायी हुयी तूतू मे मे की दुनिया का एक सत्य साड़ते सा
इसी लिए सास का दामाद भी बड़ा बे-हता बा


so_ _eal out()id rea_it-y th@ y-0-s in()id u hi_den men_al-it-y


p_ease p_oceed to ne*t un_va_lable c_oun_er


y-0-s in()id u re_eed ever-y1′ un_ble enco-un_er

di_ 0 dic_ p_ot

h@ is y-0-s _on_id-er in()id u en_ing res()olution

to s_end _ess _ime on w-w-b

0 so _ast
_here

0 even out 0 odd in()id _out
y-0-s in()id u 0 ()ven _war th@ _omes out 0 odd y-0-s in()id u _here

a si_ple 0 in_cuded _ol va_ue of y-0-s in()id u p_e-asur

खुली छूट ख़ाली ka_oot भरपूर भूत खूट

0 in a _ae g_d y-0-s in()id u s_ud

0 ever-y1 thou_ht u de_erve 0′ ever-y1 _erv

0 terri_ly ob_ective t_ough y-0-s in()id
u _ill _eep _ol sub_ects ef_ectiv

0 terri_ly ob_ective t_ough y-0-s in()id
u _ill _eep _ol sub_ects ef_ective

मै हू

मूरखो के मारदार को खो मूरे मियानी मा
बिना मूह खोले ज़ुबान जही जाती जा


सठियाये के भरपूर साठ सा
जूठे जी भरपूर जाठ जा
सास सरपूर भरपूर ठाठ ठा
नही अदर आये भरपूर चाठ चा


ग्वाची होइ सास कितनी ख़ुशी से तूतू मे मे को काट कही का
बाया भाडा भिखारी भरो एक भरपूर करजे-कारी


अदर सास को मार मिटा के ही बाहर की चिता धरोगे
(अदर की चिता तो सास को गुमा गाती गा)
येसा मुमकिन तूतू मे मे की दुनिया मै है