तूतू मे मे दुनिया मे भरपूर दिखाते है कौन से भरपूर काम मे अदर का एक-एक भरत भा
Author: mandalalit
ju_t n
1 wor_d hal_ in()id u citi__n
vs
godi’ to()tal adhe ze_
out-in
a y-0-s wal_-in be_or u out _un _halk t_im
an _out wit_ _old & in _it_ _ew un_old
(ह)
आधा मरन की मैल
जिधर जन्मे जरपूर जैल
घर गी घूरी अदर-बाहर घुसैल
इधर उधर पाने पाली पा पैल
तूतू और मे मे साथ-साथ मिलाप माप
ताघ तोर तलत तिधर-तुधर तूर ताप
होगा क्या एक-एक फिर भरपूर विलाप
बजेगी बाठी बजायेगा भरपूर भाप
घड़लो
आधे की जीती जगती ज()ब्र जे जिये ज़मीन जोर जगह जहि जची
1 b_ing y han(ji)ed 0 _an
आओ अंदर आली आसमान उड़लो
s_ill wai_ing
y-0-s fi_st con_act in()id u un()non ever_asting in_act _ol p_on
no lon_er in(out)id _ar & now a_on u in(out)id em_tee _ar
y-0-s wai_ing in()id u weilla_ers to _ae res_ect to y’all
क्यों नही
he_ling _ill s_owing do_n y-0-s _est as
0s up 4 that’s ri_ing _est
भ()हाये
हमारी बिंदी सासे छीन छेती छा छत छे छुड़ानी छुया-छूत छडे छा
येसे ही तो ज़िन्दगी की बहार इधर-उधर भरपूर भसीन भरती भा
y-0-s ने ज़िन्दगी को जीत जरपूर जिया और अदर
तुम-हारी गरपूर गाठो गा तूतू तागा तिया
सासो के ज़माने का दिन-रात से सरपूर सनेहा लेना-देना
न लोटाये भरपूर बहाने बा भिखाना भहाये
जो जा
आधा जन्म सोने के लिए सास के दामाद की तूतू मे मे ने जन्म
जाली जय जुनिया जाला जहेज जारपूर झोला जिया जहाला
जहाज जे जेठ जे झासा जावे जहान जुटने
-खा
ब्रह्माण्ड की आँखों ने देखा ज़मीन का भरपूर लेखा
जान्दरी ज़मीन जुड़े जिन्द्रियो जा जेखा
खू()ली ज़मीन खुला आसमान खेखा
भरपूर भुलेखा भूला भात भात -खा
0 साँस
a to()tal no()thing env()lop em_tee u

You must be logged in to post a comment.