तड़प तड़प ताल

भरपूर शक की नज़र नही जानती
गोदी के हक की कदर
आसमान नही गिरता जमीन नही रूकती
तब तक ख़ाली रात की रूह रही भटकती

एक-एक सास की खबर लेगा
काल का हिसाब किताब करेगा
गोदी की मिट्टी के लिये लड़ेगा
दूयिया जमीन जर्रा जर्रा डरेगा

a _or_d _as no g_oun_

& tim is ru_ning _out f_own

to kee_ up _heck wit_out to_n

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mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

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