विद्या-मथानी

श्री धन्वंतरि जी की विद्या-म()धानी को भरपूर बेचा और बिच-वायो


तभी तो इतनी बरकत बीमा(या)रियो के सवा()लो की बनायी और बनायो


विद्या तो खभी गहरी नहीं खो खक्ति खायो और खवायो


तो gut के तल के ऊपर ही भरपूर दामाद उडायो


सास तो भहरी ही भोती भरपूर भतायो


लुढ़क लुढ़क लरपूर लात लतायो

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mandalalit

to be a within 0-one-0 is to breathe for gut alone total mother nature

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