()हाज-हहा()

दुनिया के एक-एक असुर ने ही सूखा सिला सा

गोदी के माँ-बच्चे के सुरो सी ख़ाली खिल-ख्या()रियाँ

अब आना अहा आ

_ai_ing _ead chil_r()n’

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हम तो आज ही आरे-नारे
तुम-हारे हिटने हारे-वारे

ता रा

भरपूर भ()दा भूडा भास सास सा सरीर
कैसे किठाये क्यो नही क()न का ()कीर


0_ing vs ever-y-t_ing
हम-आरा अनुभव कभी तुम-हारो के भाव से सच सही सड़ता

तुम-हारो के नर का तन कौन साफ़ सड़ता
दुनिया की एक शाति आयी कहती क्यो कही कडता

क्यो के कितने कास कड़े को
अदर गी गडपूर ग()मी गी गोलता


गोदी में to()al he@ _ave से क्या कोगा
क्यो कही काडा किया ()कोर

की-मच

पंछी तो ज़मीन पर बैठते ही नहीं पैर
तो चलो क्यो नही को दुनिया दा
कडपूर कूड़ा कि-खाते
कितने
क्यो नही रुड राते


पंछी दुसरे पंछी को मार के कच्चा खचा खच खाता
असुर किसे पकाते घर के अदर बहाते
खु()बू खा()ोश खो


ਕਿੰਨਾ ਦਾਨ ਦਹੇਜ ਸੁਟ ਸਾਦੇ ਦਫ(ਨਾ)ਤਰਾ ਦੇ ਦ()ੜਪੂਰ ਦਾਤੇ
ਤਦਿ ਤੇ ਗੁਟ-ਗਟ ਅਦਰ ਪੂਰੇ ਪਾਰ ਪ()ਹੇਜ ਪਤੇ


u _no it _ill ne_er _ap_en
हम-आरी गट गट गाटे गी तुम-हारो की क्यो नही की(मची)मारी