दुर-भास

सृष्टि गोदी में नहीं है कोई

इतिहास जो हसे हास
१ दुयीया वास
ना आया भरपूर
भर-हास अभ्यास
खतम करो खडपूर खास


हरियाली निराली गोदी की जमीन
और
एक दुयीया अदर बज()र-बट्टू बीन

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अब एह च()मचे को देख दर दाड़
बो-तल ख़ाली है तो लेटा है
और भरी है तो खड़ा खाड़
कमाल कहा करा काड़

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1-2

ह() तू() बने एक-दूजे के लिये

इसी लिए तू को हमेशा हा ही मिलता है

तूतू हाहा का हीर पार पी पया पीर

दिल 10-10 दुया दुगना दरीर

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ईत्नि मुश्किल से गोदी के पूर्ण पेड़ो के प()चे
प्राणवायु(o*()gen) का आतम-निकास पार पड़ते

उससे भी दुगना असुर घर को अदर बाहर उजाडते

१ दुयीया की हव() की आग मे ()मीन का पा() पना पास-मान

def_nit_ly 0 co_su_ming असुर