ख़ाली सांसो की-म()-की का एहसास
कैसे आए अंदर ख़ाली रास
माली मटकी महा()पवास
ख़ाली सांसो की-म()-की का एहसास
कैसे आए अंदर ख़ाली रास
माली मटकी महा()पवास
दुयीया के असुर एक एक के सगे
और अपने अदर गाठो के गडपूर (द)गे ग()डे
पीठ पीछे पूरी पा पडायीया
सामने साये सरूर सडायीया
घेसा घुमाये घूघर घडायीया
जन्म एक ()धार अध-()डायीया
हम आभारी
अभी-आरी, आभा-आरी, आओ-भारी
अहि गोदी के गहरे ग()म ग()म गच्छामि
आधे शब्दों को ख़ाली सफे से सिखता सा साकि
सफ़ेद सफा सिखाए सो साफ़ सुलाए
गोदी सुंदर सुहाए
0 ac_ions _av 1 con()uence
_ill kee_ bi_t_ing adha janam se_uence
for _oun_ _ap-la-us co_men_ce 0-sense
घर के अदर का रवयीया
छूपर छू भुट्टा भयीया
रो मरूगा एक रुपयीया
पान पचे पक्का पवयीया
_es i am c_osed min_
0 _et an-y1 s_ae _lose be_ind
for 1 fr_e _eep ad_ing 0 _ind
_ar u 0 _lose
or
_ar u in()id close_
बडपूर बाते बेच बे बहा बह बडा बारे
राते राडपूर राडेगे राट रवा रे
स्व(आल) ाल तो तठता ती तही
क्यो कही का जवाब जिया जही
सि()दूर के ()वाबो की खिलेगी खून की लाली
लो लडते ला लाडपूर लिये लहाली
0 _aint _art for hea_t th_a_t
0 bu_y 1 mis_l-ace _ur-y
0 fo_m u *pe_t 1 re_orm
1 in_olve 0 con_ent revol_e
err@err
0 ali_n 1 s_ir
0-1 b_lance b_ur
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