ग-यीया

दुयीया के असुर एक एक के सगे
और अपने अदर गाठो के गडपूर (द)गे ग()डे

पीठ पीछे पूरी पा पडायीया
सामने साये सरूर सडायीया
घेसा घुमाये घूघर घडायीया
जन्म एक ()धार अध-()डायीया

जे जही जाली

बडपूर बाते बेच बे बहा बह बडा बारे
राते राडपूर राडेगे राट रवा रे

स्व(आल) ाल तो तठता ती तही
क्यो कही का जवाब जिया जही

सि()दूर के ()वाबो की खिलेगी खून की लाली
लो लडते ला लाडपूर लिये लहाली