ਪੁਠੀ ਪਈ ਚਾ()ਦਰ ਚੜੇ ਚਾਤ
ਕਦੋ ਆਏਗੀ ਬਾਰੀ ਬੂਹੇ ਬਾਤ
ਮੈ ਵੀ ਨਵਾਣਾ ਅਦਰ ਰਾਵਾ ਰਾਤ
ਨਾਤਾ ਨਹੀ ਦਗਾ ਦੀ ਦਰੁਸਤ ਦਾਤ
कारी कू
तुम्हे एक भी बीमारी बही बया
ज़ुबान खूली खुमारी खाया ख्या
सच सूरा सच
दिन भर भरपूर झूठ सच
रात रो दस्त दवा दच दच
दिन का सच न साडे सडे
रात का अरथी रथ रडे
आधा न तो घर के अदर है और न बाहर
कब को ढूढ रेहा के बर को
कबर के बूहे कहा को
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_ar u awa_er
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सृष्टि गोदी सुरक्षित साक्षी स्याल संतुलन सुधार
ਦੁਕੇ ਦਮ
ਇਹ ਸਸ ਨੇ ਤੇ ਅਦਰ ਹੀ ਅਧਾ ਜਨਮ
ਦੁਕ-ਮਨ ਕੜਾ ਕਰ ਕੀਤਾ
ਫੇਰਕਿ ਹੋਯਾ ਹੁਣ ਕੀ ਕਰਾ
ਜਾ ਬਾਹਰ ਬਹਿ ਬੇ ਬਿਆਪਾ ਬਾ
आओ अधारो
आधे के पास पडपूर पैसे पही पा
गोदी की ई()जत सुरक्षित साक्षी सा
क्या कही
मोरी मईया मेहदी अब आधे जगईआ जाओजी
आधे आन ओ()या आधा ख़ाली खान खोया
काधा केहर
बद-भहस भास के लिए गोदी घर के ख़ाली दरवाजे बंद
इसी लिए ख़ाली दीवारों दे भरपूर सर सटकदे सद्दे सद
दर दाज
जितनी खुली ज़ुबान उतनी जूठी जस जात जहाज जहान
जा खू()ली रात री रात
बाहर दिखावे दी दडपूर दिज्जत
और अदर विस()की क्यो कही कि-काली कि-जत
खतरी खाल
जिस ख़ाली लात ले गोदी का संतुलन सुरक्षित
उस ख़ाली खाट खो खा छू छक्के छार छ-वानी
पूछ पया पडी पेरो पी परायी पुरानी

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