कम-जोर-ज्यादा

अदर की कमी को भरपूर समाज के
जोर जय जाडते जिधर जा


भरपूर समाज से सिला सिखाया
पीला पढाया

आज सास साडी सर सरूप सदी
अगर- बाटी के धूये धे जाग-रूक जडी

दरपूर दाज

भरपूर कल के मा-बाप
और सोच रोले आज ले आप
किसने कल करपूर काया काप
क्या लाया आज का तरपूर ताप

जिन मा-बाप ने कल के समाज सा खरपूर खाया
वोह क्या आज के समाज से सरपूर तप तपाया

तुला ताल तिल तगमगाया

ਜਰਜੀ ਜਾਦਾ

ਪਾੜ(ਭਰ)ਪੂਰ ਪੁ()ਰਜਾ ਨੂੰ ਕਿ ਫਰਕ ਪੈਦਾ
ਜੁਬਾਨ ਜਿੰਨਾ ਮਰਜੀ ਗਦ ਅਦਰ ਵਾੜੀ ਵਾਰੇ

ਛੇ ਤੇ ਕਿਨੀ ਤੇਜ ਉਡਦੀ ਆ
ਪੰਜ ਲੈ ਆਯੋ ਵਾ

ਕਿਯੂਕਿ ਕਿਯੋਕਿ

जरपूर जुबान खरच करने से क्या कोता के
उ उड आता