
co-il


अदर की कमी को भरपूर समाज के
जोर जय जाडते जिधर जा
भरपूर समाज से सिला सिखाया
पीला पढाया
आज सास साडी सर सरूप सदी
अगर- बाटी के धूये धे जाग-रूक जडी
आधे एह क्या किया
जू जाल जाडनी थी
बाल बिकाल बया
कही किरा क्या
नजर नही नहाये
भरपूर कल के मा-बाप
और सोच रोले आज ले आप
किसने कल करपूर काया काप
क्या लाया आज का तरपूर ताप
जिन मा-बाप ने कल के समाज सा खरपूर खाया
वोह क्या आज के समाज से सरपूर तप तपाया
तुला ताल तिल तगमगाया
१० का क्या किलता के
जिसे भरपूर बहस का भास
आधा जन्म की एक गाठ गाये
गया गास गेरने दामाद दा
रो-गुना राड-पूर रास
_ar y fa()_ult_ies in(नर)_act
_ar u in _& 2ot _outh si_u()ation
yi_s
go_d_ess n()वर _eft
th@ _utch de_t
le_t _rain is con_i(s_a)tioned
2 be ri_ 1 is 0 cond_ition
& _it _ain is fu_l of 0s
lef_ a_bit-ion
तभी त()रतन सा()हर से साफ़ किया क्या
देखो देखो अदर बिस-बिस बे बडा बाल
बर-तन बन-डर बनने बहिये
ਪਾੜ(ਭਰ)ਪੂਰ ਪੁ()ਰਜਾ ਨੂੰ ਕਿ ਫਰਕ ਪੈਦਾ
ਜੁਬਾਨ ਜਿੰਨਾ ਮਰਜੀ ਗਦ ਅਦਰ ਵਾੜੀ ਵਾਰੇ
ਛੇ ਤੇ ਕਿਨੀ ਤੇਜ ਉਡਦੀ ਆ
ਪੰਜ ਲੈ ਆਯੋ ਵਾ
ਕਿਯੂਕਿ ਕਿਯੋਕਿ
जरपूर जुबान खरच करने से क्या कोता के
उ उड आता
a-l_ost eve_y1 */ien_es u_s & do_ns
0 up/do_n in/out()id
You must be logged in to post a comment.