0_ing _ess t_an su_1
wan_ mo_ than_ 0_ing _um
0_ing is in()id a_g_ry _um
पा पिया
पीठ पीछे क्यो कही रख के
सूर्य के सामने मोह का मूह रख के चलते है
तो आमने-सामने कहा मिलते है
सूर्य पीछे पलते पा
बाली बूँदियों बी
सृष्टि मईया की गोदी
न तो देवो की होती हो और न ही असुरो की
आधा बाहर कहर और आधा अंदर जहर
a pen_ up
not_ing is to_al-li tra_n_parent
ever-y1-thing is _er_orming in()id p@ent
or ho_sum _it-w_ong _ae ren_
जन्म का जय जय हाथा ()योग
सृष्टि गोदी के अंदर आधे घर के
अंदर के भरपूर (e)नाम
अपाहिज
बंजारन
अनाथ
sold & replace
(i)do u _av s_ill _ag on आधा जन्म
2 re_urn 0s tra_ma 2 re_lace
4 1 _ain सोमा
sea_ch y-0-s c_edit car_ kee_
u out of y ()sight yar_
सट्टी
गोदी की ज़मीन की मिट्टी झाड़ो
गदी न हो जाये चमडी नही
उझाडो असुरो की चिट्टी
आधा जन्म लुट्टी
भरपूर leo अमा-वस्या
सेर के मूछ मे स्वा सेर
किसने कमाया किस्मत का केर
अदर बाहर मेहर मा मेर
निगला नया नाम नर हनेर
_it on point

a dot in()id _ai_ing for dev()lop()ing
a gut surface()all in()divi_ual to _each
mi_d-fu_l_ess for dot tar_et
काया माया
दिन का खाया रात ने निभाया
सफेरे साया दिखाया भाया
अब क्यो रोदे राम राया
पीठ पीछे सब ने खाया

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