ਅੱਸੀ ਝਲੇ ਵਾਗੂ ਚਲੇ
ਨਹੀ ਰਹਿਨਾ ਅਦਰ ਥਲੇ
ਖਾਯੋ ਖੇਹ ਉਪਰ ਨੀਚੇ -ਮੀਨ ਮਲੇ
ਇਧਰ ਉਧਰ ਵੀ ਲੈ()ਯੋ ਜਲੜ ਜਲੇ
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क-मली
तुम-हारी उगलिया उगे टकली
खल्शियम खाया खाट खकली
चेहरे ची चाल चटपट चकली
चखा चाहता चकमकी चमली
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सु-नाम सग्या
जो आज्ञा भरपूर भय भाग्य
विधाता वायापुर राम राग्य
बनवास बाहर बाया बैराग्य
सासे सुदर सरनाम -योग्य
जो मै घर के अदर हू हो वोह क्या तुम बाहर तरू तूतू
समाज से सीख के आये घर के अदर भरपूर राय रू()रू
जब घरो-घरो मे अतर करते
तो घर के अदर ज()तर जय जानते
ब्रह्माण्ड के देवता
सृष्टि मईया की गोदी से छीन कर
असुरो को भरपूर भरते भा
घर के अदर भरपूर अज्ञानी
और बाहर भरपूर घर आ ज्ञानी
खे-खे-खे
एक मूह बारह आखे
रह रह बजाये बुरा बाखे
काया करे तेरा सलाखे
मेरा जवाख अदर चाखे
बाहर डाले गले दाखे
आधा जन्म सुधरा सरबार
के-शव के अनु-सार
शव है अदर सास के
अनु का भरपूर विस्तार
तत-तरु
तुम हारा तो सब कुछ तू-तू से शुरू होता
और हारा से अत आयी आता
फस गया आत()डी मे माता
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अरे यह क्या सास मरा हुया अदर नही
मारा हुया १/२ बाहर बाटे
निरंतर जंतर
ख़ाली सांसो के अंदर सम्पूर्ण शांति
जिसके ऊपर-निचे आमने-सामने इधर-उधर अंदर-बाहर
नहीं खड़ी हो सकती बटी हुई आधा जन्म की एक शक्ति

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