सु-नाम सग्या

जो आज्ञा भरपूर भय भाग्य
विधाता वायापुर राम राग्य
बनवास बाहर बाया बैराग्य
सासे सुदर सरनाम -योग्य


जो मै घर के अदर हू हो वोह क्या तुम बाहर तरू तूतू
समाज से सीख के आये घर के अदर भरपूर राय रू()रू

जब घरो-घरो मे अतर करते
तो घर के अदर ज()तर जय जानते

तत-तरु

तुम हारा तो सब कुछ तू-तू से शुरू होता
और हारा से अत आयी आता
फस गया आत()डी मे माता
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अरे यह क्या सास मरा हुया अदर नही
मारा हुया १/२ बाहर बाटे